प्र.:सर!परीक्षा खत्म हो गई, अब क्या करें?उ.:डियर! कॉलेज परीक्षा के अंतिम पेपर देने के बाद मैं अपने साथी के साथ सिनेमा देखने गया हुआ था किंतु सारी चर्चा वह आगे आने वाली चुनौतियों की कर रहा था। अर्थात् मनोरंजन के समय भी उसकी चेतना अपने आगामी लक्ष्य पर केंद्रित थी-" यारो!सफर का कुछ सरो-सामान तो करो,जाना कहां है तुमको जरा ध्यान तो करो"- कॉलेज की परीक्षा से सिर्फ डिग्री मिलती हैं,नौकरी नहीं। अतः किस प्रकार की नौकरी से सर्वाधिक संतुष्टि होगी,इसकी कार्ययोजना वह मुझे समझा रहा था। उसे किताबें पढ़ने का बहुत शौक था और दूसरे दिन उसके हाथ में स्वामी जी के जीवन चरित्र पर लिखी एक पुस्तक थी। मेरा मित्र मुझे समझा रहा था कि आज की कॉलेज की पढ़ाई नौकरी भी नहीं दे पाती ,जीवन क्या देगी। "एक अनार,सौ(नहीं करोड़) बीमार" के युग में आपकी जीवन दृष्टि यदि सही नहीं है तो अवसाद से लेकर आत्महत्या तक बात पहुंच जाती है। अतः निश्चित सिलेबस,अनुमानित प्रश्न,और रट्टे-घोटे उत्तर वाली कालेज-परीक्षा से आगे बढ़कर अनिश्चितताओं से भरे इस जीवन की परीक्षा पास करने हेतु बहुत बड़े संकल्प,श्रम और साहस की जरूरत होती हैं,उसके लिए भी तैयारी करनी चाहिए-" आग क्या चीज हैं,ये तब समझे ; जब आंच हमारे मकान में आई। मुझसे लिखा गया न कोई जवाब,जब जिंदगी इम्तिहान में आई।।"- आज वे मेरे सारे सीनियर्स और मित्र घनघोर गरीबी से निकलकर महत्वपूर्ण पदों पर पहुंच कर भी अपनी विनम्रता,अध्ययनशीलता और सादगी से मुझे प्रेरित करते रहते हैं। अपने जीवन के अनुभव से जो मैंने आपके प्रश्न का जवाब दिया है, यदि आपके काम आ जाए तो यह प्रयास सार्थक होगा। वैसे आपका प्रश्न भी मुझे बहुत अच्छा लगा क्योंकि प्रश्न यदि जीवन में उठने शुरू हों,तो जीवन बदलने लगता है।-' शिष्य गुरु संवाद'से डॉ सर्वजीत दुबे🙏🌹