Rational बनाम Emotional
April 4, 2019"Rational बनाम Emotional" :मनुष्य एक विचारशील(rational)प्राणी है- अरस्तु का यह कथन गहराई से देखने पर कई दफा मुझे सही नहीं प्रतीत होता। मेरे अनुभव में मनुष्य Rational कम Emotional ज्यादा मिले हैं। हालांकि चेतना की दोनों क्षमता है- भाव की और विचार की। किंतु अपने धर्म ,जाति,देश, क्षेत्र का नाम आते ही कौन विचार करने बैठता है कि ये सब भावनात्मक मुद्दे हैं। इसी कारण इन नामों पर जितने उत्पात मचाए गए हैं और खून बहाए गए हैं , विचारशील जगत में वह संभव नहीं हो सकता था। यह असंभव कैसे संभव हुआ? जब मैंने गहराई से सोचा तो पाया कि emotions(भाव)प्रकृति-प्रदत्त है जबकि विचारशीलता संस्कृति -प्रदत है। जिस परिवार में,समाज में,जिस जमीन पर और देश में व्यक्ति जन्म लेता है ,उसका उससे भावनात्मक लगाव हो जाता है किंतु जब शिक्षा से 'मेरे और पराए की भावना से'ऊपर उठ जाता है तो 'सर्वे भवंतु सुखिनः' की ऊंचाई पर जीने लगता है। "सम्यक शिक्षा"एक तरफ क्षेत्र-धर्म-जाति --भाषा रूपी पिंजड़े से बाहर मनुष्य को लाती है तो दूसरी तरफ खुले आकाश में उड़ने की शक्ति भी देती है। शिक्षा के राजनीतिकरण ने विचारशीलता को सबसे बड़ी हानि पहुंचाई है क्योंकि इसने खुले आकाश में उड़ने वाले पंछी को सोने के पिंजरे में बंद कर दिया-" रास आ गया हो,जिस तोते को सोने के पिंजरे का जीवन; उसके पांखों के लिए कोई आकाश नहीं होता ।पर्दे पर हैं पर्दे, और बंद पड़े दरवाजे ;दस्तक देती सदा रोशनी,पर उसका आभास नहीं होता।।"- भारत जब विश्वगुरु था तो उसके भाव और विचार दोनों ही बहुत उदार और व्यापक थे। शिक्षक,शिक्षार्थी,समाज और सरकार यह सोचें कि क्षुद्र इमोशंस को भड़काकर और विचारशीलता को पंगु बनाकर भारत विश्व गुरु बन सकता है या उदारतावादी व्यापक शिक्षा को अपनाकर? क्योंकि शिक्षा ही तय करती हैं कि कल देश किधर जाएगा और कहां जाएगा।- "शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ सर्वजीत दुबे🙏🌹