प्यास के साथ प्रतिभा मिल जाए तो बाबा साहेब का जन्म होता है
April 13, 2019"प्यास के साथ प्रतिभा मिल जाए तो बाबा साहेब का जन्म होता है": कछुए में मंजिल की प्यास थी और खरगोश में तेज दौड़ने की प्रतिभा थी किंतु 'कछुआ-खरगोश की कहानी'का मनोविज्ञान संदेश देता है कि प्यास ,प्रतिभा पर भारी साबित होती है। प्यास और प्रतिभा दोनों का एकत्र संयोग दुर्लभ है, उसी दुर्लभ संयोग का नाम है बाबासाहेब। "प्यास" ऐसी कि सारी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद मरुभूमि से ज्ञान के सागर तक पहुंच गए और "प्रतिभा"ऐसी कि विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के लिए एक ऐसे संविधान के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाई जो गीता-कुरान-बाइबिल-गुरुग्रंथ के समान पवित्र दस्तावेज साबित हुआ। हमारा दुर्भाग्य है कि परमात्मा जो अपना अंश महान-आत्मा के रूप में धरती पर भेजता है,उसे जाति, धर्म, क्षेत्र के पिंजड़े में कैद कर लेना चाहते हैं। अन्याय के विरुद्ध उनका संघर्ष था और यह अन्याय नए-नए रूप में हमारे समक्ष उपस्थित होता रहता है। आज के देश-काल मेँअन्याय के विरुद्ध जो भी आवाज उठाए जा रहे हैं, उन आवाजों में "श्री भीम राव राम जी आंबेडकर"की आत्मा बसती हैं। वे नए-नए रूप में जन्म ले रहे हैं और उनके जन्म दिवस की सार्थकता इसी में हैं कि आज के आंबेडकर को हम पहचानें और उन्हें अपना यथासंभव सहयोग और समर्थन प्रदान करें।- 'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ सर्वजीत दुबे-14 अप्रैल डॉ आंबेडकर के जन्मदिवस की शुभकामनाओं के साथ🙏🌹