CJI पर आरोप
April 22, 2019"CJI पर आरोप" : उत्तम कोटि के मानव की सबसे बड़ी कामना यश होती है। "अपयश" तो मृत्यु से भी ज्यादा दुखदाई है। उसमें भी यौन-दुराचार का अपयश सबसे बड़ी मर्मांतक पीड़ा देने वाला है। खासकर जब आप देश के सबसे बड़े निष्ठा के केंद्र हों तथा आपका जीवन उच्च मूल्यों के लिए समर्पित रहा हो, तब तो सफेद चादर पर छोटा सा भी दाग बहुत बड़ा दिखाई देता है। यहां तो चादर पर पूरा कीचड़ ही फेंक दिया गया है। ऐसे में समाज और जनमानस की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। षड्यंत्रकारी तत्व इस मनोविज्ञान का लाभ उठा जाते हैं कि अधिकतर लोग ऐसे आरोपों पर तुरंत विश्वास कर लेते हैं और तेजी से इसका प्रचार-प्रसार कर देते हैं। जस्टिस गोगोई साहब के सद्गुणों ने उन्हें इस ऊंचाई तक पहुंचाया होगा किंतु समाज व मीडिया ने उन पर लगे आरोपों पर जितना ध्यान दिया, इतना सद्गुणों पर नहीं। कई लोगों को जानता हूं जिन्होंने ऐसे आरोप लगने के बाद आत्महत्या कर ली और बाद में आरोप झूठे निकले। लेकिन यह आरोप ही इतना बड़ा है कि यौन दुराचार का आरोपी बिना मरे भी आरोप मुक्त होने के बाद भी जीते जी मरा-मरा सा,बुझा-बुझा सा हो जाता है। इस मनोविज्ञान को आज बदलने की जरूरत है अन्यथा अच्छे लोग अन्याय से लड़ नहीं सकते। इस संदर्भ में बुद्ध की एक कहानी मेरे दिल को छू गई-" बुद्ध पर उनकी ही नई शिष्या सुंदरी को प्रलोभन देकर षड्यंत्रकारियों ने व्यभिचार का आरोप लगवा दिया। जब गौतम असहनीय अपमान से गुजर रहे थे तो सुंदरी की आत्मा ने उसको धिक्कारना शुरू किया। सुंदरी के बदलते रूप को देखकर षड्यंत्रकारियों ने उसकी हत्या करवा दी। भाड़े के हत्यारों ने नशे के कारण राजपुरुषों के समक्ष सारी बातें उगल दी। राजा ने बुद्ध से पूछा- आप इतने दिन चुप क्यों रहे ,इतना अपमान क्यों सहा? बुद्ध ने कहा- सत्य अपने आप को स्वयं प्रकट करता है, बस थोड़ा इंतजार करना पड़ता है।- भगवान से प्रार्थना है कि इस मामले में इंतजार की घड़ियां जल्द समाप्त हों। बुद्ध के जमाने का समाज सरल था। आज तो समाज इतना जटिल हो गया है और प्रचारतंत्र इतना हावी हो गया है कि वह कभी सत्य को आने ही नहीं देगा। किसी महापुरुष का कथन था -"जो समाज में रहना नहीं चाहता है ,वह देवता है या दानव" किंतु मेरा मन कहता है कि जो इस जटिल समाज में रहना चाहता है,वह देवता है या दानव।- 'शिष्य- गुरु संवाद'से डॉ सर्वजीत दुबे🙏🌹