"रिसर्च" का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु मेरी दृष्टि में यह है कि जो जनजातीय विद्यार्थी उच्च शिक्षा में असहज महसूस कर रहे हैं ,उनके लिए नया रास्ता क्या है ? क्योंकि विद्यार्थियों के साथ गहराई से जुड़कर मैंने यह जाना है कि वे बहुत कुछ अच्छा कर सकते हैं किंतु किताबों की दुनिया में नहीं बल्कि वास्तविक दुनिया में । वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों के रोम-रोम से एक यही आवाज मुझे सुनाई दे रही हैं कि -"हम कहीं के न रहे घाट और घर करीब है, इस पढ़ाई के नजारे अजीब है "-जनजातीय विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की कॉपी जांच करने के बाद अधिकतर प्रोफेसर का मानना है कि जिस प्रकार से बाल विवाह करने वाले लड़के और लड़की न तो दांपत्य जीवन का उत्तरदायित्व उठा सकते हैं और न सुख ;उसी प्रकार से उच्च शिक्षा में प्रवेश पा जाने वाले कमजोर विद्यार्थी न तो पढ़ाई कर पाते हैं और न अन्य कोई काम सीख पाते हैं। फिर उनका जीवन एक बोझ बन जाता है। जो ऊर्जा पढ़ाई की तरफ गति नहीं कर पाती है, वह ऊर्जा नकारात्मक दिशाओं में जाकर भटक जाती है। आज वास्तविक स्थिति है कि-(1) 60% से ज्यादा विद्यार्थियों ने दिशा-निर्देश बिना पढ़े सभी प्रश्नों के उत्तर लिख दिए हैं(2) 80% विद्यार्थियों ने जो उत्तर लिखे हैं उसका प्रश्न से कोई तालमेल नहीं है(3)15% विद्यार्थी ऐसे हैं जो एक बार पास बुक से पढ़ कर कुछ सही दिशा में बात बनाने के प्रयास किए हैं(4)5% विद्यार्थी ही ऐसे हैं जो स्मरण शक्ति के आधार पर सही उत्तर देने का प्रयास किए हैं किंतु उनमें से1% विद्यार्थी भी ऐसे नहीं हैं जो मौलिक पुस्तकें पढ़ते हों और जिन्हें डिस्टिंक्शन का मार्क्स दिया जा सके।- यदि सभी विषयों में कमोबेश ऐसी स्थिति हैं तो इसे छुपाना अक्षम्य अपराध होगा। मेरा निवेदन है कि अब वह समय आ चुका है जब हम इन प्रश्नों पर गहराई से विचार करें-(१) क्या उच्च शिक्षा के दरवाजे सभी के लिए खोल देना युवा पीढ़ी के लिए वरदान साबित हो रहा है?(२) क्या हम खोखली जड़ों वाले विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में प्रवेश देकर उनका बहुमूल्य समय और ऊर्जा का अपव्यय नहीं कर रहे हैं?(३) एक तरफ शिक्षकों के रिसर्च-पेपर्स और सेमिनार की संख्या बढ़ती जा रही हैं और दूसरी तरफ विद्यार्थियों का स्तर लगातार गिरता जा रहा है ,क्यों?(४) शैक्षिककेतर गतिविधियों की संख्या जब से बढ़ाई गई हैं और सूचनाओं के संप्रेषण पर ज्यादा से ज्यादा जोर दिया गया है ,तब से एक तरफ क्लास में उपस्थित होने वाले विद्यार्थियों की संख्या घटी है और दूसरी तरफ उत्तर पुस्तिकाओं के स्तर में भारी गिरावट आई है, ऐसा क्यों?- नवाचार यह संकेत दे रहे हैं कि नीयत तो उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की है ;फिर गलती कहां हो रही हैं? हम सभी मिलकर सोचें वरना आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं कर पाएगी।- 'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹