राम कृपा बिनु सुलभ न सोई
May 17, 2019"राम कृपा बिनु सुलभ न सोई " मां त्रिपुरा सुंदरी की कृपा से माही की जलधारा और मावजी की भावधारा से सिंचित इस वागड़ धरा पर परमपूज्य श्री मुरारी बापू का स्वागत करते हुए मेरा हृदय आनंद से सराबोर हो रहा है। उनके मुख से "राम" का नाम सुनकर हिंदू को मंदिर की याद आने लगती हैं और मुस्लिम को मस्जिद की ,सिख को गुरुद्वारा बुलाने लगता है और इसाई को चर्च। प्रेम और पुस्तक (रामचरितमानस) रूपी दो पंखों से इस पंक्षी ने हृदयाकाश की जो ऊंचाइयां छुईं हैं, उसे देख-सुनकर हर पंक्षी को खुले आकाश में उड़ने की तमन्ना अंगड़ाई लेने लगती हैं। मेरे पिताजी के नाम में "राम"शब्द था और उनको बचपन से सुबह-सुबह "रामचरितमानस"पुस्तक के साथ बैठते देखता था। मैंने पाया कि एक कम पढ़ा-लिखा सैनिक भी इस पुस्तक से "ढाई आखर प्रेम"को पढ़ लिया और सुख-दुख,सफलता-असफलता में सम रहने की कला सीख लिया। जब राम और रामचरितमानस को बापू के मुख से सुनने का सौभाग्य मुझे मिला तो मैंने पाया कि सनातन संस्कृति के राम और राजनीति के राम में कितना बड़ा अंतर है। एक छोटे से गांव का एक साधारण शिक्षक अपनी साधना के द्वारा कितना वैश्विक और कितना असाधारण हो सकता है, इसका जीता जागता उदाहरण श्री बापू हैं।" मुखं प्रसन्नं ,विमला च दृष्टि: ,कथा अनुरागो, मधुरा च वाणी ".. से युक्त इस संत को देखकर रामकृपा स्पष्ट दिखाई देने लगती हैं-" यूं ही नहीं आता चेहरे पर ऐसा नूर-ए-खुदा , साफ दिल होना भी लाजिम है उस नियामत के लिए "..। असत्य और अप्रिय राजनीतिक वाणी से जिस समय कई दिल टूट रहे हैं ,उसी समय सत्य और प्रिय धार्मिक वाणी से दिलों को जोड़ने का यह शुभ अवसर आया है-एष धर्म सनातन:। " तुलसी मीठे वचन ते सुख उपजत चहुँ ओर , वशीकरण एक मंत्र है तजि दे वचन कठोर "- के सनातन संदेश को जन-जन और कण- कण में फैलाने में यह आयोजन अवश्य सफल होगा।- ऐसी मंगल कामनाओं के साथ'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ सर्वजीत दुबे🙏🌹