महाराणा प्रताप
June 5, 2019"महाराणा प्रताप"नाम किसी एक व्यक्ति का नहीं ,बल्कि स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए की गई संघर्ष की अभिव्यक्ति का दूसरा नाम है। व्यक्ति को तो हम जाति,धर्म, देश व काल की सीमा में आबद्ध कर सकते हैं किंतु किसी आत्मा की सर्वश्रेष्ठ अभिव्यक्ति को नहीं। आज भी जो स्वतंत्रता के लिए घास की रोटियां खाने को तैयार हैं और अपने स्वाभिमान के संघर्ष में समाज के सभी वर्गों को-मुस्लिम,आदिवासी, भील व मानवेतर प्राणी चेतक तक को जोड़ सकते हैं,उनमें आत्मा प्रताप की हैं। जिस जमाने में अन्य राजा अकबर के सामने घुटने टेक रहे थे, उस जमाने में सिर्फ सांकेतिक पराधीनता को भी स्वीकार न करने का महाराणा का निर्णय आज भी हर आत्मा को चुनौती दे रहा है-" जहां कहीं हैं ज्योति जगत में , जहां कहीं उजियाला ; वहां खड़ा है कोई अंतिम मोल चुकाने वाला ". आज जो भी संघर्ष देखें,वह सत्ता से कुछ सुविधाएं पा जाने मात्र का है जबकि प्रताप की आत्मा स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए संघर्ष करने को प्रेरित कर रही हैं।- 'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ सर्वजीत दुबे ,प्रतापजयंती की शुभकामना के साथ 🙏🌹