योग-संदेश
June 20, 2019"योग-संदेश" : प्रकृति और परमात्मा के बीच में प्राणी है। प्राणियों में भी मानव सबसे अद्भुत प्राणी है क्योंकि दानव और देव दोनों बनने की उसकी संभावना है। "योग" उस पद्धति का नाम है जो मानव को देव बनाती है। किंतु इसके लिए जरूरी है कि मानव का बाह्यप्रकृति और अंतःप्रकृति दोनों के साथ योग हो। लेकिन मानव ने बाहप्रकृति के साथ योग की जगह वियोग का संबंध बना लिया। तभी तो हवा प्रदूषित हो गई और जल सूख गया; सजीव पेड़ काट दिए गए और निर्जीव पत्थरों के मकान बना दिए गए। परिणाम में लू से बचने के लिए 144 धारा लगानी पड़ रही हैं और सैकड़ों लोग मर रहे हैं। अमेरिका में की गई एक नई शोध बताती हैं कि बढ़ रही हिंसक प्रवृत्तियों का मूल कारण है- पत्थर के मकान में और मशीन के साथ ज्यादा से ज्यादा रहना। इससे दिल पत्थर का हो गया और दिमाग मशीन का। आज जरूरत है कि ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाकर मानव वाह्यप्रकृति के साथ अपना योग बनाए अर्थात् पेड़ पौधों और जंगलों के बीच में ज्यादा रहे। चीन और अमेरिका में स्मार्टफोन की लत से प्रभावित पीढ़ी को बचाने के लिए यह प्रयोग चल रहा है।। फिर यम,नियम,आसन,प्राणायाम द्वारा अंत:प्रकृति से जुड़ना हमारे लिए सरल हो जाएगा। तब मानव का भटकता मन आत्मा की ओर गति करने लगेगा। आगे एक क्षण ऐसा भी आता है कि आत्मा से परमात्मा का योग हो जाता है और मानव देव बन जाता है। लेकिन उस क्षण को पाने के लिए पहले स्वयं से योग जरूरी है- " खुद के साथ सफर में रहें तो अच्छा है , हम बेखबर हैं खबर में रहें तो अच्छा है।।- "शिष्य-गुरु संवाद" से डॉ सर्वजीत दुबे 'योग दिवस'की शुभकामना के साथ🙏🌹