गर्ल्स कॉलेज के मायने
July 19, 2019" गर्ल्स कॉलेज के मायने " : आज की शिक्षा इंसान बनाने में नाकामयाब साबित हुई क्योंकि अक्ल तो बहुत बढ़ गई किंतु आत्मा बहुत छोटी रह गई -" अक्ल बारीक हुई जाती है, रूह तारीक हुई जाती है ".. आत्मा तो बढ़ती है दिल के बड़ा होने से। परमात्मा ने नारी को हृदयसंपन्न बनाया क्योंकि सृष्टि को आगे बढ़ाने का कार्य स्त्री के माध्यम से ही लेना था। इस सहज प्राप्त हृदय रूपी संपदा को कन्या महाविद्यालय में विकसित करना अपेक्षाकृत आसान होगा। जरूरत है सिर्फ इस बोध को विकसित करने की कि लड़कियां प्रेम व समर्पण आदि कोमल भावों को और विकसित होने दें। वे लड़कों के प्रतिस्पर्धा में न पड़ें। आजीविका के बहुत सारे ऐसे क्षेत्र हैं मसलन शिक्षा तथा चिकित्सा इत्यादि जिनमें इन कोमल भावों से सफलता के अवसर और ज्यादा बढ़ जाते हैं। मिलिट्री ,पुलिस ,प्रशासन इत्यादि क्षेत्रों में लड़कियों को जाने से रोकना मेरा उद्देश्य नहीं है बल्कि भाव यह है कि जितना ही सृजनशील क्षेत्र होता है यथा संगीत,कला इत्यादि उतना ही नारी सुलभ गुणों के कारण सफलता की संभावना बढ़ जाती है।। मस्तिष्कप्रधान शिक्षा ने जगत को क्या दिया- हिंसा,युद्ध व विध्वंस के सिवाय। अब क्यों नहीं एक हृदय प्रधान शिक्षा जगत की ओर कदम बढ़ाया जाए। स्वामी विवेकानंद भी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य हृदयसंपन्न और भावसंपन्न व्यक्तित्व का निर्माण मानते थे। उस दिशा में सिर्फ लड़कियां ही नहीं लड़के भी कदम बढ़ाएं-" नारी के जिस भव्य-भाव का साभिमान भाषी हूं मैं , उसे नरों में भी पाने का उत्सुक अभिलाषी हूं मैं " - तब कहीं जाकर यह देश गांधी के सत्य-प्रेम-अहिंसा वाला देश बन सकता है।- "शिष्य-गुरु संवाद" से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹