हे भगवन!मैं उधेड़बुन में पड़ गया हूं , तेरी दुनिया का नन्हा फूल खिलने के पहले सड़ गया हूं
July 24, 2019दलबदल या दलदल : एक तरफ मूल्यों के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वाले बापू की हम 150वीं जयंती मना रहे हैं और उसी समय मूल्यों की बलि चढ़ाकर सत्ता सुख भोगने को लालायित नेतागण सुर्खियों में छा रहे हैं। बच्चे ने अपने पापा से पूछा कि इनमें से एक नेता मेरे स्कूल में गांधी जी पर भाषण देने आ रहे हैं। पापा ने कहा कि पुत्र! जो भी वचन बोले जाएंगे ,उनको याद कर लेना निबंध लेखन में काम आएंगे। किंतु बच्चे ने पूछा कि झूठ बोलने वाला ,घृणा फैलाने वाला और हिंसक यह नेता गांधी बाबा के सत्य- प्रेम-अहिंसा का पाठ हमें कैसे पढ़ा सकता है? पिता अवाक् रह गए किंतु बहुत सोच-विचार कर अपने पुत्र को समझाया कि जब तू बड़ा होगा तो अपने आप समझ जाएगा। पुत्र के कुछ समझ में नहीं आया और वह भाषण के दिन अपने पिता की उपस्थिति में यही प्रश्न अपने स्कूल के प्रिंसिपल और नेताजी से पूछ बैठा। स्कूल के मंच पर बच्चे के पिता को बुलाया गया तो उन्होंने बच्चे की नादानी के लिए माफी मांगते हुए कहा कि हमें थोड़ा समय दिया जाए ताकि मैं अपने पुत्र को यह रहस्य समझा सकूं। सभा में उपस्थित सभी लोगों ने जोरदार तालियां बजाई और पिता की समझदारी की तारीफ नेताजी सहित सभी लोग कर रहे थे। सिर्फ वह बच्चा अलग-थलग पड़ गया ,गुमसुम रहने लगा और इस छोटी सी उम्र में आकाश की ओर टकटकी लगाए बुदबुदा रहा था- " हे भगवन!मैं उधेड़बुन में पड़ गया हूं , तेरी दुनिया का नन्हा फूल खिलने के पहले सड़ गया हूं ". - 'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ सर्वजीत दुबे🙏🌹