प्राचार्य हाय-हाय और मुर्दाबाद को सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा क्योंकि युवा पीढ़ी में जोश है और एक आग है। लेकिन दुख भी बहुत हुआ क्योंकि यह जोश और आग निरर्थक मुद्दे के लिए दिखाई दिया। आग से रोशनी भी होती है और घर भी जलता है। हम शिक्षकों का यह परम कर्तव्य है कि युवा पीढ़ी के इस आग को ठंडा नहीं पड़ने दें। लेकिन उन्हें यह बताना भी हैं कि निरर्थक मुद्दों के लिए लगी आग घर को जला सकती है-" युवा भटके रास्तों पर दौड़ते हैं , जब सफर का रहनुमाखामोश होता है। आओ मिलकर हमसभी उन्हें आवाज दें, साथ जिनके जोश के कुछ होश होता है*।।"- अतः हर शिक्षक को विद्यार्थियों के जोश के साथ अपने होश को भी मिलाना होगा। यह जवानी बहुत बड़े सार्थक मुद्दों की तलाश में है और संयोगवश कन्या महाविद्यालय पहुंच गयी जहां नियमित कक्षाएं चल रही हैं और हर दिवस को बहुत ही गंभीरता से सार्थक चर्चाओं के साथ मनाया जाता है। इसके अतिरिक्त प्रतियोगिता दक्षता क्लास में अतिरिक्त पसीना बहाया जा रहा है ताकि हमारे विद्यार्थियों को बड़ी नौकरी मिल जाए। प्रतिभाशाली शिक्षकों के इतने बड़े समर्पण और सेवा को यदि मुद्दा बनाया जाता तो यह जोश स्वर्ग - निर्माण की दिशा में बढ़ जाता ।। मीडिया, प्रशासन और समाज से मैं करबद्ध निवेदन करना चाहता हूं कि तिल का ताड़ बनाने के लिए आप सभी कॉलेज में आ गए और पढ़ने-पढ़ाने में दिन-रात लगा हुआ हमारा कन्या महाविद्यालय ताड़ के समान बहुत सारा प्रमाण गुणवत्तायुक्त शिक्षा का अपने पास सुरक्षित रखे हुए हैं; क्या कभी आप सभी शिक्षा के क्षेत्र में बरसों से की जा रही साधना का प्रमाण देखने के लिए कॉलेज में आ सकते हैं? क्या कभी आप सभी कक्षाओं में नियमित आने वाली छात्राओं से बात करने के लिए समय निकाल सकते हैं? यदि हां, तो यह शिक्षक आपको विश्वास दिलाता है कि श्री हरिदेव जोशी जी ने विकास की जो गंगा वागड़ में बहाई थी, वैसी ही ज्ञान की गंगा यहां पर शिक्षक बहा रहे हैं। कन्या महाविद्यालय से एक नई राजनीति शुरू होगी ,जहां के विद्यार्थी पढ़ने के लिए और सार्थक मुद्दों के लिए अपना जोश दिखाएंगे ; लड़ने के लिए और निरर्थक मुद्दों के लिए नहीं-" युवाओं के जोश के साथ शिक्षकों के होश को _भी मिलाना होगा , इस अंधेरी रात में एक नया ग्यानदीप जलाना होगा ।"- शिष्य-गुरु संवाद से डा.सर्वजीत विद्यार्थी🙏🌹