Super Thirtyका संदेश,आनंद का हो शिक्षा-देश : अध्यवसाय और व्यवसाय की दो दृष्टियां हैं जगत में ।सुपर थर्टी के प्रो.आनंद कुमार ने अपनी अध्यवसाय की दृष्टि के कारण प्रतिभा को तराशने में अपना जीवन लगा दिया।इसका माध्यम बनी शिक्षा। किंतु व्यवसाय की दृष्टि वालों ने शिक्षा को पैसा बनाने का माध्यम बना लिया है-" शिक्षा का रास्ता स्वर्ग की ओर जाता है" -लेकिन वह स्वर्ग प्रतिभा से बनता है, पैसे से नहीं । एक तरफ Brain-Drain के कारण भारत में निर्मित प्रतिभाएं विदेशों की सेवा में लग जाती हैं तो दूसरी तरफ व्यवसाय की दृष्टि के कारण अनगिनत प्रतिभाएं पैसों के अभाव में दम तोड़ देती हैं अथवा नकारात्मक दिशा में चली जाती हैं। प्रो. आनंद हर क्षेत्र में हैं किंतु व्यवसाय की दृष्टि रखने वाली व्यवस्था ने उन्हें लाचार बना दिया है। अलीशान भवनों और आधुनिक यंत्रों से सुसज्जित संस्थान आज पहली प्राथमिकता है जबकि पहली प्राथमिकता में आनंद जैसे शिक्षक होने चाहिए, जिनके पास प्रतिभा को पहचानने की और उसे निखारने की प्रेमपूर्ण दृष्टि होती हैं।। शिक्षा जगत में बढ़ते तनाव और उसके कारण आत्महत्या को मजबूर प्रतिभाएं यह संदेश दे रही हैं कि शिक्षा जगत आनंद का जगत भी बन सकता है; बशर्ते शिक्षक के पास प्रतिभा को पहचानने और निखारने की दृष्टि हो। साथ ही विद्यार्थियों के पास प्यास हो।। समाज और सरकार से तो बस इतनी ही अपेक्षा है कि वे प्यासे और सागर के बीच में बहुत बड़ी दीवार बनकर खड़ी न हो जाएं;वरना कई कली फूल बनने से पहले मुरझा जाएगी अथवा फूल बनने के बाद विदेशी उपवन की शोभा बढ़ाएगी और बाहर ही अपना सुगंध फैलाएगी क्योंकि-" वह जहां भी जाएगा ,रौशनी लुटाएगा .... किंतु जहां से जाएगा ,वहां अंधेरा हो जाएगा " -'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे " सुपर-थर्टी " फिल्म देखने के अनुरोध के साथ🙏🌹