संवाद-उन्मुखी वाणी की अदाकारा : किसी की विचारधारा आपको खूबसूरत नहीं लगे किंतु व्यक्तित्व अत्यधिक खूबसूरत प्रतीत होता हो तो समझिए उस शख्सियत का नाम सुषमा जी हैं।वकील,राजनेता और शिक्षक का काम बिना बोले नहीं चल सकता और आज अधिकतर बोल विवाद को जन्म देने का मुख्य कारण बन जाते हैं।ऐसे माहौल में उस शख्सियत का चले जाना एक जिंदा प्रेरणा स्रोत का असमय में पटल से अदृश्य हो जाने के समान एक स्वप्न की भांति प्रतीत हो रहा है। वकील और राजनेता होने के बावजूद सभी दलों में अपनी सर्वस्वीकार्यता बना लेना एक अद्भुत कला है। इन दोनों को किसी एक पक्ष में खड़ा होना पड़ता है लेकिन सुषमा जी की अद्भुत वक्तृत्व कला के कारण आज हर पक्ष उनके साथ खड़ा है।इसका मूल कारण था कि उनकी वाणी वाद , विवाद से गुजरते हुए संवाद की मंजिल को स्पर्श करती थी। जैसे कोई बड़ा शिक्षक सागर के समान अपनी विचारधारा को विस्तृत कर छोटी-छोटी नदियों को अपने में समाहित कर लेता है।" भारत क्या है? "- इसकी परिभाषा जो उनके द्वारा संसद में दी गई थी,आज भी मेरे दिल को छूती हैं;उनका भाव था-"जहां कश्मीर का सेव कन्याकुमारी के बच्चों के गाल पर लाली बन कर छा जाता है और कन्याकुमारी का नारियल का पानी कश्मीर के कंठ में उतर कर दिल की प्यास बुझाता है,वह भारत है।" आज दुनिया से उनका शरीर अवश्य चला गया किंतु उनका यह विचार यदि हम अपने मन- वचन-कर्म से अमर कर सकें तो वह सच्ची श्रद्धांजलि होगी-'शिष्य- गुरु संवाद'से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹