आदिवासी कौन और उनका धर्म क्या
September 10, 2019आदिवासीयत और धर्म -"आदिवासी कौन और उनका धर्म क्या" एक विचारणीय विषय है।मेरी समझ में हिंदू,इस्लाम,क्रिश्चियन,सिख धर्म नहीं है। धर्म का अर्थ है जिसके धारण करने से एक अभेद्य रक्षा कवच का निर्माण होता है। इस परिभाषा से जिस प्रकार समस्त प्राणियों के लिए विज्ञान एक है उसी प्रकार से धर्म भी एक होना चाहिए। पर्यावरण संकट के इस युग में प्रकृति से बड़ा धर्म क्या हो सकता है.-" आग है,पानी है,मिट्टी है, हवा है मुझमें , फिर मानना पड़ता है कि खुदा है मुझमें "- क्षिति,जल,पावक, गगन, समीर इत्यादि तत्वों से मिलकर जो प्रकृति बनती हैं ,उसी में परमात्मा भी छिपा है। विज्ञान से प्राप्त शक्ति के दुरुपयोग के कारण प्रकृति के विध्वंस से अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।इस प्रकृति के साथ सहज- स्वाभाविक जिसका संबंध है, वह आदिवासीयत से भरा है। चैतन्य की उत्तम अवस्था प्राप्त लोगों का भी संबंध प्रकृति से वैसा ही सहज स्वाभाविक होता है जैसा आदिवासियों का। गौतम और वर्द्धमान महल छोड़कर जंगल में गए जहां उन्हें ज्ञान और आनंद की प्राप्ति हुई तब वे बुद्ध और महावीर कहलाए।हमारा दुर्भाग्य है कि हम पत्थर की दीवारों के भीतर बैठकर आदिवासी और उसके धर्म को समझना चाहते हैं। जबकि खुले आकाश के नीचे, बहती जलधाराओं के किनारे घने जंगलों के बीच उनका निवास होता है। अतः शिक्षा आदिवासियों के निर्दोषता को बचाते हुए उसे पूर्ण होश से भर दे और तथाकथित विकसित व शिक्षित लोग प्रकृति से बिना छेड़छाड़ किए उसका सदुपयोग करने की कला सीख लें तो एकनया युग बन सकता है। इसमें विकास के साथ प्रकृति सुरक्षित और समृद्ध होगी और प्रगतिशील मनुष्य भी आदिवासी जैसा सरल-सहज होगा।-'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹