भरी भीड़ में हम आज इतने अकेले हो गए हैं , बुनियाद की धरती पर हर सिम्त जलजले हो गए हैं
September 20, 2019शिक्षक-संगठनों का अस्तित्व- उच्चतर-मूल्यों के साथ अपने सामूहिक हितों की प्राप्ति के लिए व्यक्ति जब एकत्रित होते हैं तो संगठन अस्तित्व में आता है। संगठन का प्राण मूल्यों में निवास करता है, सिर्फ संख्या में नहीं। मूल्य-विहीन संगठन गिरोह में तब्दील हो जाता है।रावण का प्राण उसकी नाभि में स्थित अमृत-कुंड में था, जब अमृत-कुंड को निशाना बनाया गया तो रावण मर गया अन्यथा एक सिर काटने पर पुनः दूसरा सिर जुड़ जाता था।जब-जब शिक्षक राष्ट्र , धर्म और शैक्षिक-गुणवत्ता जैसे मूल्यों के लिए व्यक्तियों को जोड़ने का प्रयास किया है,तब-तब उसे अद्भुत सफलता मिली है। किंतु आज शिक्षक-संगठनों के संख्या-बल में एक तरफ बढ़ोतरी हो रही हैं तो दूसरी तरफ उनका आत्मबल अत्यंत क्षीण होता जा रहा है।शिक्षक-संगठनों के अधिवेशन में चिंतन के लिए जुटे लोगों की संख्या और उनकी उत्सुकता बता देती हैं कि यह औपचारिकता मात्र है।ज्यों ही स्वार्थी-तत्वों ने राजनीति से सांठगांठ कर अपने मूल्यों की तिलांजलि दे दी त्यों ही शिक्षक- संगठन की आत्मा मर गई। _ शिक्षकों_ के प्राण विद्यार्थियों में और शैक्षिक - गतिविधियों में बसते हैं। शैक्षिक गतिविधियों के क्षीण होते ही विद्यार्थियों ने विद्यालयों से एक दूरी बना ली।विद्यार्थी रूपी प्राण से विहीन शिक्षक कितनी भी संख्या में कितना भी बड़ा संगठन बना लें, उनमें वह तेजस्विता आने वाली नहीं है।जब तक विद्यार्थियों के साथ पुनः आत्मीय संबंध बनाने की रणनीति पर और शैक्षिक गतिविधियों की वृद्धि पर गंभीर चिंतन कर स्पष्ट रूपरेखा नहीं बना ली जाती और उस पर अमल नहीं किया जाता तब तक शिक्षक बेरुह हैं। एक समय था जब एक शिक्षक सैकड़ों- हजारों विद्यार्थियों का आदर्श होता था और उस शिक्षक के साथ इतने परिवार और समाज के लोग जुड़े होते थे।आज शिक्षक का संबंध सिर्फ अपनी आजीविका बचाने मात्र से रह गया है। उसका विद्यार्थी पर और समाज पर प्रभाव क्षीण होता जा रहा है।। खासकर सरकारी शिक्षा जगत में जहां पर समाज के पिछड़े और गरीब विद्यार्थी विशेष रूप से जुड़ते हैं ,उनके साथ इतना गहरा और व्यापक संबंध बनाया जाए कि उनके जीवन को बदला जा सके ,तब जाकर शिक्षक की शक्ति बढ़ेगी ।और ऐसे शक्तिमान शिक्षकों के एकजुट होने से संगठन प्रभावी होगा;अन्यथा-" भरी भीड़ में हम आज इतने अकेले हो गए हैं , बुनियाद की धरती पर हर सिम्त जलजले हो गए हैं" -शिक्षक और शिक्षार्थी का आत्मीय संबंध ही बुनियाद है तथा शैक्षिक गतिविधियां शिक्षक-संगठनों की शक्ति हैं।-शिष्य गुरु संवाद से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹