खेल-संघ एक खिलाड़ी के मनोविज्ञान से चले तो उसमें जो अमूलचूल परिवर्तन आएगा, उसका सीधा लाभ खेल और खिलाड़ी को मिलेगा।भारत का यह दुर्भाग्य है कि खेल-विशेषज्ञों को दरकिनार कर खेल की उन्नति की योजनाएं बनाई जाती हैं और बड़े सपने देखे जाते हैं "जाके पैर न फटी बिवाई , वो क्या जाने पीर पराई" . गांगुली के बीसीसीआई अध्यक्ष बनने से इस बोर्ड का सौरभ और गौरव कुछ और ही होगा।उनकी निगाहें अधिकतम प्रतिभाओं को तराशने पर होगी और खेलों को एक नई ऊंचाइयां देने पर होगी। अब आशा है कि खेल की मूलभूत सुविधाओं के विकास पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में छुपी हुई प्रतिभाएं बाहर आ पाएंगी।अभावग्रस्त क्षेत्रों से संघर्षशील लोगों के उभरने से आमजन में खेल भावना गहरी पैठ बना पाएगी। स्टार कल्चर की जगह भारत में स्पोर्ट्स कल्चर विकसित करने के लिए यह आवश्यक है कि सभी जगह खेल अधिकारियों की अनिवार्य रूप से नियुक्ति की जाए और खेल की आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराई जाए। आशा है एक खिलाड़ी के शीर्ष नेतृत्व पर पहुंचने से क्रिकेट के साथ अन्य उन खेलों को भी बढ़ावा मिलेगा जो ग्रामीण अंचलों में बहुत लोकप्रिय हैं।- 'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ सर्वजीत दुबे🙏🌹