नास्ति तृष्णा समोव्याधि:,नास्ति क्रोध समोवह्नि:
November 8, 2019पति,पत्नी और वो- ईर्ष्या और क्रोध का साथ आग पर पेट्रोल डालने के समान है।भरतपुर में डॉक्टर पत्नी द्वारा सौतिया-डाह मेँ उठाया गया कदम कल्पनातीत है;किंतु आज यह तथ्य भी है और सत्य भी है। शिक्षा, पद व प्रतिष्ठा कैसी भी हो ;उससे मन की निम्नवृत्तियां(काम-क्रोध-ईर्ष्या)ऊंचवृतियों र्मेँ रूपांतरित नहीं होती। अतः यह अविद्या है। "नास्ति तृष्णा समोव्याधि:,नास्ति क्रोध समोवह्नि:"- अर्थात तृष्णा के समान रोग नहीं है और क्रोध के समान आग नहीं है। पत्नी के रहते हुए प्रेमिका की चाह 'ये दिल मांगे मोर' का रोग है। यह तृष्णा कभी पूर्ण नहीं होती। अन्य आग में सामान(वस्तु) जलते हैं, क्रोध कीआग में जिंदा-इंसान जलते हैं और आत्मा जलती है। अतः उस विद्या की और विद्यालय की आज बहुत जरूरत है जो काम-क्रोध-लोभ को एक सीमा के बाहर न जाने देने का प्रशिक्षण दे। जल-वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों से भी ज्यादा खतरनाक वैचारिक प्रदूषण से होने वाली आत्मा की मौत है।-'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹