मैं न होती भावना , फिर तू कहां भगवान होता । सैकड़ों पाषाण में से , तू भी एक पाषाण होता।।
November 11, 2019आस्था को कानूनी आधार- राम जन्मभूमि आस्था का प्रश्न है-"मैं न होती भावना , फिर तू कहां भगवान होता । सैकड़ों पाषाण में से , तू भी एक पाषाण होता।।"रामलला को कानूनी व्यक्ति मानकर सुप्रीम कोर्ट ने भावना को एक वैचारिक आधार प्रदान कर दिया।जो न्यायालय सिर्फ तथ्यों और सबूतों के आधार पर चलता है,उसने भी रहस्य के क्षेत्र को स्पर्श किया है। हृदयऔर मस्तिष्क इसी शरीर के अंदर हैं और सब एक दूसरे से जुड़े हैं।असहमति का पक्ष आज क्षीण दिख रहा है। मंदिर-निर्माण के साथ मानव-निर्माण का भी एक बहुत बड़ा यज्ञ शुरू करने की यह शुभवेला है।न्यू इंडिया का नया धर्म मानवता का धर्म होगा जिसमें यह ध्यान रखा जाएगा कि राम और मोहम्मद में कोई विवाद नहीं है-एक प्रेम के प्रतीक हैं तो दूसरे शांति के; तो फिर हिंदू और मुसलमान में संवाद की जगह विवाद कैसे और क्यों आता है? अपनी आस्था का सम्मान करने के साथ ही दूसरे की आस्था का सम्मान करने का बोध भी जागृत करना समय की महती आवश्यकता है।। भारतभूमि का यही सौभाग्य है कि यहां पर अनेक रास्तों से चलकर लोग उस परम सत्य तक पहुंचे हैं-"एकं सद् विप्रा बहुधा वदंति।"अतः मंदिर -निर्माणऔर मोहम्मद साहब के जन्मदिन की जहाँ एक साथ शुभकामना दी जाती हैं, वह भारत देश है।-'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ सर्वजीत दुबे🙏🌹