_किताबों की जगह हाथों_ _में बोतलें हैं , फिर पूछते हो_ _क्यों इतने नापाक हौसले हैं
December 8, 2019गीता-जयंती : दिशा हीन समाज में नई गीता के जन्म की परिस्थितियां तैयार हैं। श्री कृष्ण ने कृष्णा को निर्वस्त्र होने से बचा लिया। किंतु द्रौपदी के प्रश्नों ने सत्ता को और समाज को पूर्णतया निर्वस्त्र कर दिया। नारी के अपमान की कीमत पूर्ण विनाश के रूप में चुकानी पड़ती है। रावण और दुर्योधन तो फिर से जिंदा हो गए किंतु राम और कृष्ण पत्थर की मूर्ति बन गए। चारो तरफ अश्लीलसाइट्स और शराबखाने हमारी सरकार तथा समाज के संरक्षण में खूब चल रहे हैं। किंतु गुरुकुल में शिक्षक बहुत कम पड़ रहे हैं-" किताबों की जगह हाथों में बोतलें हैं , फिर पूछते हो क्यों इतने नापाक हौसले हैं" - काउंटर करना और फांसी देना विषैले वृक्ष की पत्तियां काटने के समान है। पापी वृक्ष को जड़ से मिटाने के लिए इस गीता जयंती के शुभ अवसर पर कोई कृष्ण फिर से धर्मसंस्थापनार्थाय इस जगत को बताए कि-'इतनी बड़ी युवा शक्ति को यदि मानव बम बनने से बचाना हो तो मदिरालय नहीं, शिक्षालय चाहिए और आपत्तिजनक साइट्स नहीं भगवतगीता चाहिए।-'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹