आग क्या चीज है , यह तब समझे जब आंच हमारे मकान में आई ; मुझसे लिखा गया न कोई जवाब , जब जिंदगी इम्तिहान में आई
December 20, 2019अंधे और लंगड़े ने जंगल की आग से बचने के लिए सर्वप्रथम अपनी अपूर्णता को महसूस किया और परस्पर-सहयोग को तत्पर हुए।किंतु यह बात बहुत पुरानी है और उस जमाने की है जब व्यक्ति का अहंकार सर चढ़कर नहीं बोलता था। अहंकार की पराकाष्ठा वाले आज के जमाने में अंधे को आंख की जरूरत नहीं है और लंगड़े को पैर नहीं चाहिए। अतः आग चारों तरफ लगाई जा रही है और बढ़ाई जा रही है। पड़ोसी के दुखी होने पर बगलवाला खुश नहीं हो सकता है;अतः ब्रह्म -ऋषियों ने 'सर्वे भवंतु सुखिनः' की कामना की।किंतु आज के राज -ऋषियों ने पड़ोसी के दुखी होने पर जश्न मनाने की कला सीख ली है। यदि पड़ोसी का घर जल रहा हो तो क्या आंच हमारे मकान तक नहीं आएगी? -"आग क्या चीज है , यह तब समझे जब आंच हमारे मकान में आई ; मुझसे लिखा गया न कोई जवाब , जब जिंदगी इम्तिहान में आई".- 'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹