अटल संदेश-एक प्रधानमंत्री(नेहरू जी) को विपक्ष की कुर्सी पर बैठे युवा सांसद अटल बिहारी जी में भावी प्रधानमंत्री की संभावना दिखाई देती हैं और उस विपक्षी नेता के विराट हृदय में अपने देश के प्रधानमंत्री (इंदिरा जी) में दुर्गा का अक्स दिखाई पड़ता है- कभी ऐसी थी भारत की राजनीति। एक दूसरे से मुक्त भारत बनाने की आज की राजनीति में वाजपेयी जी का नाम अंधेरी रात में चमकते सितारे के समान है-" अंधेरी रात में एक सितारा भी बहुत होता है , आंखवालों को एक इशारा भी बहुत होता है ". विपक्ष के नेता की कुर्सी हो या सत्तापक्ष के नेता की कुर्सी;दोनों को जिस शख्सियत ने नई ऊंचाइयां दी है ,उनके स्मरण-मात्र से ही संसद और सांसद के प्रति हृदय सम्मान से भर जाता है। विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने जितनी सम्मान सहित सूक्ष्म आलोचना सरकार की की , उतना ही सत्ता-पक्ष के नेता के रूप में उन्होंने धैर्यपूर्वक अपनी आलोचना को सुना भी;और अपने आप को सुधारा भी।एक वोट के अंतर से अपनी सरकार गंवाने वाली शख्सियत अपने उसूलों और सहृदयता से ऐसा अटल-संदेश छोड़ गया कि"आने वाली पीढ़ियां शायद ही अब विश्वास करे कि ऐसी भी राजनीति होती है।- 'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ सर्वजीत दुबे की भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏🌹