सिर्फ अहसास है यह , रूह से महसूस करो
December 26, 2019अलौकिक-रिश्ते- मामा बालेश्वर दयाल ने यूपी (इटावा) से आकर भील-अंचल में जनजागृति हेतु अपना जीवन समर्पित कर दिया।प्रेम और करुणा रूपी दो पंखों से उड़ान भरने वाले इस मानव-पंछी ने अशिक्षा तथा अन्याय के विरुद्ध ऐसा अभियान चलाया कि यहां के जन-जन को एक खुला आकाश का दर्शन हो गया और वे अनेक रूढ़ियों और व्यसनों से मुक्त होकर प्रगति के रास्ते पर चल पड़े। यमुना के किनारे पले- बढ़े व्यक्ति ने माही के किनारे बसे लोगों के दिलों में इतनी गहरी पैठ जमाई कि इस क्षेत्र ने उनको मामा उपनाम से संबोधित किया और उनके नाम पर एमबीडी कॉलेज कुशलगढ़ खोला गया। इस रिश्ते को क्या कहेंगे? आज भी प्रेम और श्रद्धा से भरे आदिवासी और सामान्यजन उनकी तप:स्थली बामनिया में स्वत: प्रेरणा से इकट्ठे होकर उनके बताए मार्गों पर चलने का संकल्प लेते हैं । क्षेत्र-जाति-धर्म-लिंग की सारी दीवारें गिरा देने की क्षमता प्रेम-करुणा-श्रद्धा में यहां स्पष्ट दिखाई देती है। दूर क्षेत्र का ब्राह्मण होकर भी भीलों के जल-जंगल - जमीन के संघर्ष के लिए मामा जी ने यहां के सामान्य वर्गों का भी जितना सहयोग प्राप्त कर लिया, वह आश्चर्यजनक है। आज के जमाने में किसी जाति-धर्म-क्षेत्र का नेतृत्व करने के लिए उसी से संबंधित होना अनिवार्य सा लगता है किंतु मामा की कहानी बताती है कि किसी की पीड़ा यदि हृदय में बैठ जाए और उसके लिए त्याग-तपस्या हेतु व्यक्ति तैयार हो जाए तो एक अलौकिक रिश्ता बनता है-" सिर्फ अहसास है यह , रूह से महसूस करो ".'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे की पुण्यतिथि पर सादर श्रद्धांजलि 🙏🌹