नववर्ष की शुभकामना देते हुए परमात्मा से प्रार्थना करता हूं कि नए होने का जो साहस और संकल्प चाहिए,वह हमें प्राप्त हो; क्योंकि- नया देश अमेरिका प्रतिभाओं को पालने और बढ़ाने की नीति के कारण विश्व का सिरमौर बन गया और सबसे पुराना देश भारत अतीत में इतना उलझ गया है कि वर्तमान की वास्तविक चुनौतियों को ही देख नहीं पाता;तो फिर भविष्य की तरफ आंखें कैसे उठे? युवाओं का देश भारत ऊर्जा और उत्साह से लबरेज है किंतु इसकी दशा और दिशा प्रश्नों के घेरे में हैं। पाठशालाओं और प्रयोगशालाओं के कारण पश्चिम अंधकार युग से निकलकर प्रकाश के युग में प्रवेश कर गया।किंतु हमारे यहां शिक्षक-विहीन-पाठशाला और संसाधन-विहीन-प्रयोगशाला भी विचार-विमर्श का मुख्य मुद्दा नहीं है;फिर नए विचार और नए अविष्कार कहां से आएंगे?-" एक वे हैं पांव कल की सीढ़ियों पर है ,एक हम इतिहास पर जिल्दें चढ़ाते हैं ; कुछ अंधेरे रोशनी के साथ आते हैं , कुछ उजाले हैं कि साए छोड़ जाते हैं"..'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹