युग-युग तक परिवार से कीमत करे वसूल , कभी किसी एक मोड़ पर किसी एक की भूल
January 8, 2020डेथ वारंट- निर्भया को असली व पूर्ण न्याय सिर्फ पापी को फांसी देने से नहीं मिल जाता है। बल्कि वह परिवार जहां ऐसे दरिंदे बड़े होते हैं,वह समाज जिसमें ऐसी घटना घटती है और वह व्यवस्था जिसमें उसे संरक्षण मिलता है;सभी की जिम्मेदारी तय करने का वक्त है। पाप इतना बड़ा था कि एक पापी ने तो स्वयं ही फांसी लगा ली,अन्यों को फांसी अब लगेगी।किंतु इनके परिवारों को जो फांसी लग चुकी है, वह बहुत कम को दिखाई पड़ेगी-" युग-युग तक परिवार से कीमत करे वसूल , कभी किसी एक मोड़ पर किसी एक की भूल " किंतु उस परिवार ने यदि ऐसा विषाक्त फल पैदा किया है तो उसे सामाजिक बहिष्कार और अन्य प्रकार का दंड मिलना ही चाहिए। लेकिन इसी समाज के कुछ वकील पापियों के पक्ष में खड़े हुए और जानबूझकर न्याय-प्रक्रिया में विलंब पैदा किए। और अंत में कल्याणकारी राज्य की यह व्यवस्था जिसमें शराब और अश्लील साइट्स के लिए भी समुचित प्रावधान है। जनसंख्या-विस्फोट के ऊपर युवा-शक्ति के चरम विस्फोट का हिंसा और अपराध के रूप में सामने आना बहुत बड़े खतरे की घंटी है। इस चुनौती से व्यक्ति,परिवार,समाज और व्यवस्था की अलग-अलग और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करके ही निपटा जा सकता है;जिसके लिए स्वामी जी ने बार-बार कहा था कि"हमें मनुष्य बनाने वाली शिक्षा की जरूरत है". 'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹