First Be then Make
January 11, 2020विद्यार्थी और राजनीति गांधीजी ने विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज का बहिष्कार कर भारत की आजादी के आंदोलन में कूदने का आह्वान किया था।उस वक्त गुरुदेव टैगोर ने इससे असहमति जाहिर की थी और कहा था कि विद्यार्थी को पूर्णतया शिक्षा के लिए समर्पित होना चाहिए।यदि एक बार भी वे राजनीतिक आंदोलन में शरीक हो जाएंगे तो फिर शिक्षा में राजनीति प्रवेश कर जाएगी। तब बापू ने कहा था कि युवा शक्ति के बिना आजादी प्राप्त नहीं हो सकती। आजादी की लड़ाई में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही किंतु यही युवा- विद्यार्थी और राजनीति का संबंध आज सबसे बड़ी चिंता एवं चिंतन का मुख्य बिंदु बन गया है।सक्रिय राजनीति में विद्यार्थियों की भूमिका जितनी बढ़ती जा रही है, उतना ही ज्यादा शैक्षिक माहौल प्रभावित होता जा रहा है।। अधिकांश शिक्षाविद टैगोर की तरफ खड़े हैं और मानते हैं कि विद्यार्थियों को राजनीति से दूर रहना चाहिए किंतु राजनीतिक- नेतागण मानते हैं कि विद्यार्थी का राजनीतिक प्रशिक्षण उन्हें सजग नागरिक बनाएगा ।। मेरा अनुभव टैगोर के पक्ष में खड़ा है क्योंकि विद्यार्थी बिना किसी विचारधारा को गहराई से जाने और समझे किसी संगठन के सदस्य बन जाते हैं या बना दिए जाते हैं।फिर संगठनों के वर्चस्व की लड़ाई शैक्षिक वातावरण को प्रदूषित कर देती है। अधिकतर विद्यार्थियों के समक्ष जीवन-निर्माण और आजीविका का संकट सबसे बड़ा संकट होता है किंतु स्वाध्यायी-विद्यार्थियों की कुछ नहीं चलती। इस द्वंद्व में स्वामी विवेकानंद की एक सीख रास्ता दिखाती प्रतीत हो रही है- " First Be then Make ".शिष्य-गुरु संवाद से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹