हे मन के अंगार!अगर तुम लौ न बनोगे , क्षार बनोगे ; जो न किरण की रेख बनोगे , धूलि धुएं की धार बनोगे
January 31, 2020गांधी व कलाम का यह देश है,शरजिल व गोपाल का नहीं : एक विभाजनकारी विचार देकर और दूसरा हिंसक आचरण करके मीडिया के कारण सुर्खियों में आ जाता है।पूरा देश पक्ष और विपक्ष में बंटता दिखाई देने लगता है।इस बीमारी का नाम है- ध्यान की कमी। इंसान की मूल प्रवृत्ति है कि वह ध्यान चाहता है। यदि यह सृजनकारी हो तो व्यक्ति अपने आप में डूब जाता है।कई डॉक्टर,इंजीनियर, वैज्ञानिक साहित्यकार,कलाकार और खिलाड़ी ध्यान में डूबे हुए अपने काम को कर रहे हैं।मीडिया उनको चर्चा का विषय बहुत कम बनाता है। सृजनशील लोगों को अपने काम में इतना आनंद आ जाता है कि नाम की भी उन्हें चिंता नहीं रहती।। दूसरी तरफ वे लोग हैं,जिन्हें बिना सृजनशीलता के दूसरों का ध्यान खींचना है। और मीडिया को ब्रेकिंग न्यूज़ की तलाश है।तब गाली और गोली का अद्भुत मिश्रण तैयार हो जाता है। गांधी व कलाम जैसा सदनाम बनने के लिए बहुत त्याग-तपस्या करनी पड़ती हैं।ज्ञान-ध्यान-भजन मेँ अहर्निश जुटना पड़ता है।। किंतु बदनाम होने के लिए तो क्षणमात्र की उत्तेजना और मूढ़ता काफी हैं। नीचे गिरने के लिए छत से एक छलांग लगा देना काफी है और ऊपर चढ़ने के लिए हर कदम की सीढ़ी बड़ी मेहनत से तैयार करनी पड़ती है- "हे मन के अंगार!अगर तुम लौ न बनोगे , क्षार बनोगे ; जो न किरण की रेख बनोगे , धूलि धुएं की धार बनोगे "-'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹