जहां कभी जेल की दीवारें थीं, वहां आज चिड़ियां चहचहाती हैं ; रोज नए-नए गीत गाती हैं और अपने अरमानों को सजाती हैं। समाज से उनको थोड़ा अवकाश चाहिए और सरकार से एक खुला आकाश चाहिए।।
February 5, 2020कन्या महाविद्यालय के मायने- हरिदेव जोशी राजकीय कन्या महाविद्यालय(बांसवाड़ा) इस मायने में अनूठा है कि यह स्थान कभी कारागृह था;आज यह मुक्तिगृह है और वहां पढ़ने-पढ़ाने का यज्ञ चल रहा है।किसी भी समाज की उन्नति में कन्या-शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान होता है क्योंकि महापुरुषों को जन्म देने के लिए महान-माताओं को ही परमात्मा माध्यम बनाता है। धर्म, जाति,भाषा इत्यादि अनेक आधारों पर बंटते जा रहे देश और समाज के समक्ष जो विखंडन का खतरा है उससे निबटने का एकमात्र मंत्र है- जोड़ने का भाव। यह भाव कन्याओं में नैसर्गिक रूप से पाया जाता है। लड़कियां हृदय-प्रधान होने के कारण एक तरफ बेटी के रूप में अपने पिता के घर को रौशन कर देती हैं तो दूसरी तरफ पति के घर को भी बहू के रूप में प्रेम का मंदिर बना देती हैं। पीहर से लेकर ससुराल तक की सारी जिम्मेदारियों को निभाती हुई अपनी सेवा और समर्पण से जीवन को स्वर्ग बना देती हैं।। आज जरूरी है कि उनके लिए एकमात्र उच्च शिक्षा के इस केंद्र को सब का भरपूर सहयोग मिले। परिवार- समाज का दायित्व है कि बेटों के समान ही बेटियों को भी पढ़ने के लिए पर्याप्त अवकाश दे और सरकार से अपेक्षा है कि ज्ञान के पंछियों को खुला आकाश उपलब्ध करावे ताकि वे अपनी प्रतिभा के अनुरूप जीवन की सर्वाधिक ऊंचाइयां चूम सकें -" जहां कभी जेल की दीवारें थीं, वहां आज चिड़ियां चहचहाती हैं ; रोज नए-नए गीत गाती हैं और अपने अरमानों को सजाती हैं। समाज से उनको थोड़ा अवकाश चाहिए और सरकार से एक खुला आकाश चाहिए।।" शिष्य-गुरु संवाद से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹