दिल्ली के दिल में क्या है? "स्वास्थ्य,शिक्षा और रोजगार , विकास के हैं तीन आधार"- फिर चुनाव में इन तीन मुद्दों पर गंभीर बातचीत और वाद-विवाद क्यों नहीं होता?-यह प्रश्न युवा भारत को कांटे की तरह चुभ रहा है। दिल्ली का चुनाव अद्भुत होता है।वह एक जगह जिस पार्टी को पूरी तरह नकार देती है, उसे दूसरी जगह पूरी तरह स्वीकार कर लेती है। इसका मतलब है कि दिल्ली को बखूबी पता है कि किस जगह कौन सा दल काम का है। चुनावी-चर्चा मतदाताओं के प्रशिक्षण का सशक्त माध्यम होती है। किंतु जब भावनात्मक वाक्यों पर या मुद्दों पर 90% समय लगाया जाए तो क्रियात्मक मुद्दों के लिए 10% ही बच पाता है।। ऐसे में मीडिया और शिक्षा जगत की महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं कि मुद्दों का चयन करना सिखाए, जिस पर उम्मीदवार अपनी बात कहने के लिए बाध्य हो। अन्यथा जहां नदी नहीं है, वहां पुल की चर्चा जोर शोर से हो रही है।-'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹