21फरवरी विश्व मातृभाषादिवस के रूप में मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन अपनी मातृभाषा बांग्ला के लिए बांग्लादेशवासियों ने बलिदान दिया।यूनेस्को ने उनके संघर्ष को मान्यता दी।। मेरे घर में भोजपुरी बोली जाती है किंतु पढ़ाई हिंदी माध्यम के स्कूल में हुई। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इंग्लिश भाषा भी पढ़नी पड़ी। आज संस्कृत का एसो.प्रोफेसर हूं किंतु जहां नौकरी करता हूं वहां के लोग वागड़ी बोलते हैं।पड़ोस में रहने वाले मलयाली,पंजाबी,सिंधी,बंगाली,ब्रज बोलते हैं।कहीं यात्रा पर निकलता हूं तो अनेक बोलियों और भाषाओं से परिचय हो जाता है। अर्थात् जीवन विविधता से भरा है। एक तरफ दूसरों से जुड़ने के लिए दूसरे की भाषाओं को सीखना जरूरी है तो दूसरी तरफ अपनी मूल भाषा यानी मातृभाषा का संरक्षण-संवर्धन भी जरूरी है। जड़ में पानी डालने से पत्तियां हरी बनी रहती हैं- "शाख से पता अगर जुदा हो जाएगा,हादसों का फिर शुरू एक सिलसिला हो जाएगा "- -'शिष्य- गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹