सु मन कैसे बने?- आंख के माध्यम से जो दृश्य और कान के माध्यम से जो शब्द हमारे अंदर प्रवेश करते हैं,वे ही हमारे मन का निर्माण करते हैं। दृश्य और शब्द की अपवित्रता के कारण भारत का माहौल कामुक और हिंसक हो गया है।अतः पॉर्नोग्राफी और भड़काऊ बयान के विरुद्ध समाज में कड़े विरोध के स्वर उठने लगे हैं।इनपर अवश्य रोक लगनी चाहिए किंतु सरकारें और समाज दोनों बेबस नजर आ रहे हैं। अश्लीलत साइट्स से अरबों की कमाई और भड़काऊ भाषण से वोटरों के ध्रुवीकरण का आसान सा रास्ता कु-व्यवसायियों और कु -राजनीतिज्ञों को मिल गया है। ऐसे हालात में स्वयं के विवेक और परिवार के संस्कार के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता कि भावी पीढ़ी को बलात्कारी और दंगाई होने से बचाया जा सके- "मैं महकती हुई मिट्टी हूं किसी आंगन की , मुझे दीवार बनाने पर तुली है दुनिया ; लोहे को गलाकर जो मैंने खिलौने ढाले , उनको हथियार बनाने पर तुली है दुनिया"..'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ सर्वजीत दुबे🙏🌹