अप्रैल फूल डे
April 1, 2020मूर्ख दिवस पर लिखे इस मूर्खतापूर्ण लेख को पढ़कर मूर्ख बनने की कोई जरूरत नहीं--" अप्रैल फूल डे "में से अप्रैल और डे हटा दिया जाना चाहिए क्योंकि अप्रैल माह और दिन ही नहीं बल्कि जीवन का हर क्षण मूर्खता की उद्घोषणा कर रहा है। मूर्ख दिवस मनाने के पीछे मूल मकसद था-' दूसरे को मूर्ख बनाकर हंसी-ठिठोली करना '-किंतु आज हर व्यक्ति स्वयं को ही मूर्ख बना रहा है। इस मूर्खता से कोई हास रस उत्पन्न नहीं हो रहा है बल्कि उत्पन्न हो रहा है विनाश:-(1)अलवर में नशे में बिहार के युवकों ने अपने राज्य के पूर्व मंत्री को 12 दिनों से कई लोगों के भूखा होने का ट्वीट किया। हड़कंप मच गया और जब टीम राशन किट लेकर वहां पहुंची तो यह सत्य सामने आया- मजाक किया, मूर्ख बनाया। मैं सोच में पड़ गया-' बुद्ध के देश में क्या सिर्फ बुद्धू बचे हैं?(2) प्राचार्य होने के नाते31 मार्च को एक कर्मचारी की सेवानिवृत्ति हेतु कागजात पर साइन करने कॉलेज पहुंचा। एक किलोमीटर में तीन जगह चेकिंग और सड़कें सूनी पाई तो लॉकडाउन की सफलता पर गर्व होने लगा लेकिन मकानों के अंदर समूह में बैठकर ताश खेलने,कैरम खेलने और फिल्म देखने का समाचार मिला। अखबार में चेन्नई के गुरु नानक कॉलेज में क्वॉरेंटाइन में रखे प्रवासी श्रमिकों को बड़े प्रोजेक्टर पर साथ-साथ, पास-पास बैठकर फिल्म देखने का फोटो देखा तो मेरे होश उड़ गए क्योंकि यहां तो क्वॉरेंटाइन विद वैलेंटाइन मनाया जा रहा है।(3) मरकज का अर्थ होता है- केंद्र. मूर्खता के कारण यह कोरोनावायरस का सबसे बड़ा केंद्र साबित हुआ क्योंकि बताने वाली चीज को छुपाकर जितना बड़ा अपराध यहां से हुआ है, उसका अनुमान लगाना संभव नहीं।(4) क्वोक यंग युएन नामक चीनी वैज्ञानिक ने 2007 में चमगादड़ खाने की आदत को टाइम बम कहा था। आज वह टाइम बम कोरोनावायरस के रूप में सर्वत्र फूट चुका है,फिर भी चीन इससे सबक नहीं ले रहा। वुहान- ट्रेजडी के बाद फिर से वेट मार्केट शुरू हो गया। इससे बड़ी मूर्खता का और क्या प्रमाण होगा?(5) अमेरिकी थिंक टैंक रैंड कॉरपोरेशन ने 2012 में कहा था-' अमेरिका को आतंकवाद से अधिक खतरा महामारी से हैं'- किंतु आतंकवाद से लड़ने हेतु 100 अरब डॉलर और महामारी से लड़ने के लिए एकअरब डॉलर का बजट निर्धारित किया गया। अब मूर्खता के कितने सबूत चाहिए?(6) अपने देश की रक्षा का बजट देखिए और शिक्षा-चिकित्सा का बजट देखिए जो बुद्धिमता का सबसे बड़ा प्रमाण है। यह बताता है कि शिक्षा और स्वास्थ्य तो भगवान देख लेंगे किंतु शत्रु को तो हमें ही देखना पड़ेगा।- संस्कृत ग्रंथों में विदूषक का पात्र हैं जो अपनी मूर्खतापूर्ण हरकतों और कथोपकथनों से हास्य-रस की सृष्टि करता है किंतु उसमें बहुत बड़ी कल्याण की बातें छिपी होती हैं। आज सर्वत्र बुद्धिमता के पात्र हैं जो अपनी चतुरतापूर्ण हरकतों से विनाश के नजदीक ले जा रहे हैं। मजाक जिंदगी में हो तो अच्छा किंतु मजाक जिंदगी से हो तो. ....... मूर्ख दिवस की शुभकामनाएं ग्रहण कीजिए। 'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ सर्वजीत दुबे🙏🌹