ख्याल
April 7, 2020आपका ख्याल आते ही मुझे एक खयाल आया..... "ख्याल" - एयरपोर्ट पर उतरते ही अंश और अमन की खुशी का ठिकाना न रहा क्योंकि दोनों को स्क्रीनिंग में पास कर दिया गया। बरसों बाद दोनों दोस्त लंदन से अपनी पढ़ाई पूरी कर लौटे थे। घर पहुंचने की जल्दी थी और अपनों से मिलकर बहुत सारी बातें कहनी- सुननी थी। दोनों एक दूसरे से गले मिले और एक साथ दोनों के जुबान से यह बात निकली कि विदेश से सही सलामत लौट आए वरना चार कंधा देने वाला भी वहां कोई नहीं मिलता। किंतु अंश इस वाक्य की समाप्ति पर गंभीर हो गया। अमन ने कहा कि यार!हर बात को सीरियस मत लिया करो। मेरे घर जाने वाली बस सामने तैयार है ,मैं चला। न पता अंश क्यों सोच में डूबता चला गया। एक-एक कर उसे बुरे ख्याल आने लगे। प्लेन में भी क्वॉरेंटाइन, सेल्फ- आइसोलेशन आदि बातें सुनता आ रहा था। कहीं ऐसा न हो कि जल्दी में सारा मामला गड़बड़ हो जाए। लंदन में संक्रमण तो था ही ,क्या पता प्लेन में भी कोई संक्रमित हो? अभी तो टेस्ट में कुछ नहीं आया किंतु कुछ लोगों को तो देर से भी लक्षण का पता चलता है। अपनों से मिलने के पहले,क्यों न किसी डॉक्टर से मिल लूं? अभी तो यह छोटी सी आशंका है किंतु कहीं बड़ी निकली तो....। वह डॉक्टर के पास पहुंच गया तभी अमन का फोन आया कि तू अपने घर पहुंचा कि नहीं? नहीं यार!मैं तो डॉक्टर के पास हूं- उसने जवाब दिया। अमन ने कहा कि क्यूँ,तेरी तबीयत खराब है क्या? अंश ने कहा- नहीं। किंतु अंतर्मन में कुछ उधेड़बुन चल रही थी, अत:डॉक्टर से मिलने आ गया। अमन ने कहा कि तू नाहक परेशान होता रहता है,देख!मैं तो अपने फैमिली मेंबर्स के साथ खाना खा रहा हूं और कुछ देर में अपने अड़ोस-पड़ोस में मिलने जाऊंगा। अंश को डॉक्टर ने सलाह दी कि क्यों नहीं कुछ दिनों के लिए गहन जांच प्रक्रिया से गुजर जाते हो? मन का वहम भी खत्म हो जाएगा और सब की सुरक्षा भी हो जाएगी। अंश अंतर्मुखी प्रवृत्ति का था ,इसी कारण वह अंतर्मन में उठते हुए द्वंद्वों को गहराई से देख पा रहा था। एक सप्ताह बाद डॉक्टर ने उसे सलाह दी कि अब आप घर पहुंच कर भी कुछ दिन अकेले में ही रहिएगा। अपने रूम में बैठा अंश टीवी देख रहा था। उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। ब्रेकिंग न्यूज़ चल रही थी कि लंदन से आने वाले अमन और उसके मां-बाप को कोरोना पॉजिटिव पाया गया और उसके अन्य परिवार सहित सारे सगे-संबंधियों को भी क्वॉरेंटाइन कर दिया गया है। बाहर से आने की सूचना उसने छुपाई थी और इस बीच अपने गांव भी गया था। गांव में भी हड़कंप और दहशत का माहौल था। अंश को काटो तो खून नहीं। उसका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतरी की ओर बढ़ रहा था किंतु इस खबर ने उसे गुमसुम कर दिया। एक छोटा सा ख्याल जिसे उस वक्त उसका दोस्त अमन नकारात्मक बता रहा था, बहुत सकारात्मक निकला। उधर अमन पर एफआइआर भी दर्ज हुआ। दूसरे दिन अमन के पिताजी के कोरोना पॉजिटिव से मरने की खबर हेड लाइन में आ रही थी। अंतिम संस्कार हेतु प्रशासन ने इजाजत नहीं दी। किन्ही दो सदस्यों को परिवार से उपस्थित रहने को कहा गया। किंतु सभी हॉस्पिटल मेँ थे। अतः कोई नहीं आ सका अंतिम दर्शन को। उनके शव को श्मशान घाट वालों ने अंतिम संस्कार की इजाजत नहीं दी। अत: दूर के खेत में शव को जलाया गया और उसका वीडियो घर वालों के पास भेज दिया गया। अंश प्रत्येक दिन सेल्फ-आइसोलेशन में बैठा इन सारी खबरों को देख-सुन रहा था और सोच रहा था ......न पता किन क्षणों में एक ख्याल मेरे जेहन में उतरा और मैं रुक गया। प्यार और लगाव तो घरवालों से मुझे भी था किंतु किसी अदृश्य अनहोनी की आशंका ने मुझे दौड़कर सबको गले लगाने से रोक दिया। अमन मिलनसार काफी था किंतु बहुत जल्दी में रहता था। उसके भी तो जेहन में ऐसे ख्याल उठे होंगे, किंतु वह इतनी हड़बड़ी में था कि उसे सुन नहीं पाया।। अमन के किस्से ज्यादा चर्चित होने से अंश का भी नाम चर्चा में आया। अमन को लेकर अंश काफी चिंतित और परेशान था- छोटी सी एक भूल ने सारा गुलशन जला दिया। दूसरे दिन अमन के मां की मौत की खबर भी सुर्खियों में आने लगी। अंश सिहर उठा-" क्या अमन ने इतना बड़ा पाप किया है कि उसकी मां भी किसी खेत में जलाई जाएगी और वह भी प्रशासन की निगरानी में?" किंतु विधाता को यही मंजूर था। अंश से रहा न गया और उसने अमन को फोन मिलाया। बस अमन इतना ही बोल पाया कि काश! जेहन में उभरे उस ख्याल को मैं भी सुन लेता और मान लेता। ऐसा नहीं कि रुक जाने का ख्याल मेरे दिल में नहींआया था। किंतु घर पहुंचने की और अपनों से मिलने की जल्दबाजी इतनी थी कि मैं अनसुना कर गया। अमन!तूने उस ख्याल को पकड़कर खुद भी बच गया और सारे परिवार को भी बचा लिया। अमन बिस्तर पर पड़े-पड़े बड़बड़ा रहा था- ऐ खुदा! क्या तुझे सिर्फ बुदबुदाना आता है, चिल्लाना नहीं? - 'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ सर्वजीत दुबे🙏🌹