जान है,तो जहान है
April 13, 2020अविद्या भी,विद्या भी "- कोरोना महामारी से निपटने में लॉक डाउन के असर पर देश में गंभीर चिंतन-मनन चल रहा है। अपनी अर्थव्यवस्था को ताक पर रखकर एक कड़े निर्णय द्वारा महामारी को फैलने से बहुत हद तक रोक दिया गया- 'जान है,तो जहान है' दृष्टिकोण को प्रमुखता में रखकर। दूसरी तरफ अमेरिका ने अर्थव्यवस्था पर होने वाले नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए लॉकडाउन का फैसला लेने में देर कर दी और सुविधा-संपन्न देश अपने नागरिकों के जान बचाने में विफल रहा। लॉकडाउन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सेल्फ-आइसोलेशन और सोशल डिस्टेंसिंग को पालन कराने में रही। सामान्य भारतीय जनमानस शांत होकर स्वयं के साथ घरों में बिना काम किए नहीं बैठ सके। उन्होंने सभाएं की और सामाजिक-मेलजोल को जारी रखा; जिसके कारण देश के सामने कम्युनिटी-स्प्रेड का खतरा उत्पन्न हो गया। भारत को अपनी गलतियों से सीखना होगा और उपनिषद के ऋषियों का यह मंत्र ध्यान में रखना होगा कि ' अविद्यया मृत्युं तीर्त्वा'- अविद्या से मृत्यु के पार जाया जा सकता है। विज्ञान कोरोना रोगी को ठीक करने में,इसे फैलने से रोकने में और मरने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। किंतु यह अविद्या है क्योंकि यह पदार्थ का तथा पर का ज्ञान है। मृत्यु को रोकने में, दीर्घ और स्वस्थ जीवन देने में इस ज्ञान की बड़ी महता है;किंतु हमारी संस्कृति इसे अविद्या कहती है क्योंकि आजीविका से जीवन जीने की सुविधाएं तो मिल जाती हैं लेकिन आनंद नहीं मिलता। इसी कारण स्वीडन जैसे देश में तो मरने के अधिकार के लिए आंदोलन चल रहे हैं। यूथेनेशिया का आंदोलन यह मांग करता है कि संविधान में राइट टू डाई दिया जाए। आखिर क्यों? क्योंकि जीवन लंबा हो और उसमें सुख-आनंद न हो तो उससे बेहतर मृत्यु है। उपनिषदों को इस बात का पता था,इसीलिए उनका मंत्र है- ' विद्यया अमृतं अश्नुते '- अर्थात् विद्या से अमृत या आनंद की प्राप्ति होती है- रस तो अनंत था अंजुरी भर ही पिया , जी में बसंत था एक फूल ही लिया.- यदि रस अनंत हैं और पूरा जीवन बसंत हैं तो हम नीरसता में और पतझड़ में क्यों जीते हैं? विद्या क्या है? विद्या सेल्फ-आइसोलेशन में self-realization की है। व्यक्ति सिर्फ तन और मन ही नहीं है, जिसके लिए बाहर दौड़ता रहे। व्यक्तित्व में आत्मा है जो सच्चिदानंद स्वरूप है, जिसे रुककर और भीतर जाकर खोजना पड़ता है। महामारी से जान को खतरा और अर्थव्यवस्था के गिरने से आजीविका को खतरा दोनों मिलकर हमारी समस्याओं को दोगुना कर देते हैं। ऐसे में भारत को अविद्या द्वारा आजीविका की चुनौतियों से निबटना पड़ेगा और विद्या द्वारा प्राप्त जीवन में आनंद भरने की कला सीखनी होगी।- 'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे बाबा साहब के जन्मदिवस की शुभकामनाओं सहित🙏🌹