देने का आनंद-प्रवासी मजदूरों के लिए एक स्कूल में खाने व ठहरने की व्यवस्था प्रशासन द्वारा की गई। शिक्षकों के सान्निध्य में न जाने क्या घटा ? उन मजदूरों ने परिसर की साफ-सफाई करके सारी दीवारों की पुताई कर डाली। विद्यालय मंदिर सा लगने लगा। इस काम में लगे मजदूरों का जब वीडियो सामने आया तो काम में लीन उनके चेहरे पर जो आनंद और तृप्ति दिखाई दी,वो आश्चर्यजनक थी। मजदूरों ने बताया कि खाने-पीने की व्यवस्था बहुत प्रेम से की जा रही है। किंतु हम मजदूर हैं।बिना मजदूरी किए हमें कुछ भी दिया जाए तो वह रास नहीं आता। गांव वालों से हमसब ने विनती की-" हमें साफ-सफाई और रंग-रोगन का सामान दे दिया जाए।" सामान मिलते ही काम में हमने अपने प्राण मिला दिए। इससे एक तरफ तो हम घर से दूर रहने की टीस भूल गए और दूसरी तरफ अपने काम का परिणाम देखकर हमें अपने वजूद का अहसास होने लगा। प्रबंधकर्त्ताओं और मजदूरों के बीच में एक ऐसी हारमनी विकसित हुई कि जीवन रूपी वीणा से संगीत बज उठा- यूं तो सूखी मन की बगिया तुम चाहो नंदन हो जाए , यूं तो टूटी सी मन-वीणा तुम चाहो कंपन हो जाए पूर्व राष्ट्रपति कलाम साहब ने कहा था- " शिक्षा लेने वाली वृत्ति को देने वाले वृत्ति में तब्दील कर देती है।" लगता है- संकट की इस घड़ी में मानवीय-चेतना में कुछ अद्भूत रूपांतरण हो रहा है। मजदूर से लेकर उद्योगपति तक,बच्चे से लेकर बूढ़े तक और झोपड़ी से लेकर महल तक कुछ देने के भाव से भर गए हैं जो कि अभूतपूर्व है। पत्थर के भवनों में दी जाने वाली शिक्षा से लोभी-वृत्ति वाले लोग ही सामने आ रहे थे। संकट के क्षणों की शिक्षा Love वृत्ति वाले इंसानों को सामने ला रही है; तभी तो बच्चे अपने गुल्लक की सारी रकम दान कर दे रहे हैं और बूढ़े अपने जीवन भर की कमाई को। एक झोपड़ी में दिव्यांग बालिका दिन-रात मास्क बनाने में लगी हुई है तो बड़े-बड़े महलों को आश्रय देने के लिए खोल दिया गया है। कोरोनावायरस जनित इस संकट की घड़ी का कौन स्वागत करेगा? किंतु दिलों की उदारता को बढ़ाने के कारण मेरा दिल तो इस घड़ी पर कुर्बान हुआ जा रहा है- सीखे कहां नवाब ज्यूं ऐसी देनी देन , ज्यों ज्यों कर ऊंचो करौ त्यों त्यों नीचे नैन। देनहार कोई और है , भेजत सो दिन-रैन; लोग भरम हम पर करें याते नीचे नैन।।- परमात्मा हर व्यक्ति को देने की क्षमता के साथ धरती पर भेजता है। देने का आनंद जिस मन को मिल जाए , वह मन धरती को स्वर्ग बना देगा।'शिष्य- गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹