पुलिसवाला कभी नायक,कभी गायक
April 28, 2020संकट को शुभ-अवसर बना लिया है पुलिस-विभाग ने। ब्रिटिश- काल की अत्याचारी और भ्रष्टाचारी छवि को 70 वर्षों के स्वतंत्रता-काल में भी पुलिस नहीं बदल पाई थी किंतु कोरोना-काल का अद्भुत सदुपयोग उन्होंने किया है। लॉकडाउन को सफल बनाने के लिए- " पुलिसवाला कभी नायक,कभी गायक ,तो कभी मजाकिया बन जाता है ; तुम्हारे लिए न जाने कितने मुखौटे लगाता है लेकिन इन मुखौटों के पीछे छिपी उनकी मानवीय संवेदना ने सबका दिल जीत लिया है। आंखें तरेर कर कम शब्दों में आदेशात्मक भाषा में बात करने वाली पुलिस आंखों में प्यार लिए विस्तार से मनुहार की भाषा बोल रही हैं। खाने के पैकेट हाथों में लेकर जब पुलिस वाले निर्धन- बेसहारा लोगों के पास पहुंच रहे हैं तो भूखे लोग एक बार अन्न- देवता को खाकी-वर्दी में देखकर अपनी आंखों पर विश्वास नहीं करते। पुलिस विभाग में मेरे साथी और रिश्तेदार हैं और वे काफी सहृदय हैं; किंतु कार्यस्थल पर आज तक उनका कड़क रूप ही देखा है। उनकी यही कठोरता जब घर-परिवार के माहौल में भी आने लगी तो चिंतन के बाद यही निष्कर्ष निकला कि उनके काम की प्रकृति और काम का बोझ उनके व्यक्तिगत व घरेलू जीवन को भी तनावपूर्ण बना देती है। परंतु कोरोना-काल की स्थितियां तो ज्यादा ही तनावपूर्ण हैं और खतरनाक भी।। फिर ऐसा क्या हुआ कि उनके कंठ सुरीले हो गए हैं और हृदय विशाल? चिलचिलाती धूप से लेकर संक्रमित स्थानों तक में पुलिस ने एक दिव्य- रूप ले लिया है,तभी तो वह कभी नगमें गाकर हौंसला-अफजाई करती हैं तो कभी मेडिकल जांच में आनाकानी करने वाले लोगों के समक्ष क्लिनिकल ट्रायल के सब्जेक्ट की तरह खुद को पेश कर। तभी तो कुछ पुलिसवालों की जान चली गई हैं और सैकड़ों संक्रमित हो गए हैं। उनके परिवार वालों पर क्या गुजर रही हैं ,इसका तो हिसाब लगा पाना भी मुश्किल है। किंतु इतना हिसाब तो आज हर कोई लगा रहा है कि इतनी दुआओं को अपने पुण्य-कार्यों से इकट्ठी करती हुई खाकी-वर्दी "पुलिस देवो भव" अर्थात् पुलिस को देवता समझो कहने पर हमें विवश कर रही हैं।। हाथ कट जाने के बाद भी अपनी ड्यूटी निर्वाह करते हुए हरजीत सिंह जैसे पुलिस वाले को देखता हूं तो मेरे दिल में भी यह बात उठती है कि पंजाब-पुलिस की तरह " मैं वी हां हरजीत सिंह "अर्थात् मैं भी हूं हरजीत सिंह का बैज अपने सीने पर लगाऊं। काश! "यही जज्बात हर एक दिल में उभर सकते हैं , किसी के आंसू किसी अन्य की आंखों में उतर सकते हैं". 'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹