आए हो तो दुनिया में कुछ ऐसे निशां छोड़ो , हर आंख में आंसू हो जब तुम यह जहां छोड़ो
April 30, 2020इरफान का अर्थ होता है ज्ञान । 'संसार माया है'यह ज्ञान बहुत सुना-" ब्रह्म सत्यं,जगत् मिथ्या" किंतु संसार के अतिरिक्त जब तक अन्य किसी सत्य ( ब्रह्म )का अनुभव न हो जाए तब तक संसार ही सत्य दिखाई देता है। दर्शक के लिए प्राचीन काल में रूपक (नाटक) और आधुनिक काल में फिल्म का पर्दा इतना बड़ा सत्य है कि कलाकार के रोने पर वह रोता है और हंसने पर हंसता है। कलाकार अपनी कला या दृश्य सीन(Scene) के माध्यम से दर्शक के दिलो-दिमाग में छा जाता है। वह जाति,धर्म,क्षेत्र आदि की संकीर्ण दीवारों को तोड़कर अपना एक विराट अस्तित्व बना लेता है। साथ ही आपको विराट होने का संदेश भी दे जाता है।। इरफान को इस बात का ज्ञान हो गया था कि उनकी जिंदगी ज्यादा लंबी नहीं है। अतः अपने काम में स्वयं को वे शत-प्रतिशत झोंक देते- "आए हो तो दुनिया में कुछ ऐसे निशां छोड़ो , हर आंख में आंसू हो जब तुम यह जहां छोड़ो". कोरोना से मौत की खबरों के बीच एक कलाकार की असामयिक मौत दहशत के साथ गम का दरिया बहा देती है। मौत हर पल हो रही है और सर्वत्र हो रही है किंतु मरने के बाद भी कुछ लोग अपने कर्मों और इंसानियत के कारण जिंदा रहते हैं। एक अभिनेता ने ओशो के सामने अपनी डायरी देकर कहा कि कुछ लिख दें।ओशो ने लिखा- " अभिनय ऐसे करो जैसे वह जीवन हो और जीवन ऐसे जियो जैसे अभिनय हो" - इरफान साहब ने ठीक ऐसा ही किया तभी तो वे मकबूल(सर्वप्रिय) हो गए। अपनी कला से कई दिलों को जीतने वाले कलाकार को हार्दिक श्रद्धांजलि .... 'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹