मानवेत्तर प्राणियों की प्रार्थना कुबूल करूं या मानव की?
May 11, 2020एक अजीब सपना मैंने देखा कि परमात्मा सबसे सहायता मांग रहा है-" मानवेत्तर प्राणियों की प्रार्थना कुबूल करूं या मानव की?"-- मानवेत्तर प्राणियों की प्रार्थना - हे भगवन्!मानव को कुछ और दिन घर में ही बंद रखना।कोरोना को जल्दी से वापस मत बुला लेना। नहीं तो ये बाहर निकलकर जल को गंदा कर देंगे, वायु को प्रदूषित कर देंगे, पृथ्वी की छाती में कई छेद करके पानी निकाल लेंगे, आकाश के ओजोन लेयर में फिर से बड़ा होल बना देंगे, पशु-पंक्षियों का जीना मुहाल कर देंगे और जल-थल-नभ सब पर एकाधिकार जमा लेंगे। इन लोगों ने तो सभी जीव-जंतुओं का घर छीन लिया; अब अपने घर में रहने में भी मानवों को दिक्कत हो रही हैं? मानव की प्रार्थना - हे करुणानिधान! घर में बंद रहते-रहते देखो तो हमारी क्या दशा हो गई! ऐसा लगता है कि हम पिंजरे में कैद हो गए हैं। अकेले रहते-रहते बहुत बोर हो गए हैं। दोस्तों के साथ मिलकर सैर-सपाटा करना और सिनेमाहॉल-शॉपिंगमॉल में जाकर धूम धड़ाका करना, लगता है एक जमाने की बात हो गई। नौकरी छूट जाने से पैसे का भारी नुकसान हो गया। कोरोनावायरस के डर के मारे तुम्हारे मंदिर तक बंद हो गए। शादियां तक खटाई में पड़ गईं।-- मानव और मानवेतर प्राणियों की प्रार्थना सुनकर परमात्मा उधेड़बुन में पड़ गए। और सोचने लगे मैंने तो यह सृष्टि रची थी कि पेड़-पौधे, पशु-पंछी, नर-नारी सभी एक दूसरे का सहयोग करते हुए आनंदपूर्वक मिलजुल कर रहते हुए इस संसार को स्वर्ग बनाएंगे। मेरे लिए तो सारे जीव समान रूप से प्रिय हैं। एक पेड़ कटे या पशु या मानव; सब रूपों में मैं ही तो कटता हूं। इन दोनों अजीब प्रार्थनाओं में से किसको कुबूल करूं? क्योंकि-" सबमें मेरा रूप समाया , कौन है अपना कौन पराया ".'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹