कल्याण-मित्र
August 2, 2020"कल्याण-मित्र" शब्द का उपयोग बुद्ध को करना पड़ा। मित्रता के कई रूप जरूर उनकी नजरों में आए होंगे। सामान्यत:मैत्री का आधार प्रेय होता है। एक दूसरे को जो बातें प्रिय और रुचिकर होती हैं, उनको शेयर करते हुए घनिष्ठता बढ़ जाती है। असाधारण लोगों की मैत्री का आधार श्रेय होता है। इसमें संबंध कुछ इतना गहरा होता है कि एक दूसरे को गलत रास्ते पर जाते देखकर मित्र विरोध कर उठता है और उसे सही रास्ते पर लाकर ही मानता है। नि:स्वार्थभाव के कारण 'मूल्य' मैत्री का आधार होता है, आवश्यकता या उपयोगिता नहीं। जब मूल्य-विहीन घनिष्ठ संबंध बनते हैं तो उसे मैत्री कहना उचित नहीं होगा क्योंकि दोनों एक दूसरे को अकल्याण के रास्ते पर ले जाने में मददगार साबित होते हैं- "अंधे अंधा ठेलिया दोनों कूप पड़ंत". स्कूली-दिनों की मित्रता की याद आज भी जब ताजा हो जाती है तो उस दीवानगी का स्मरण हो आता है जो एक दूसरे के प्रति बेवजह थी। एक बार क्लास- टीचर उसे पीट रहे थे तो 2-3 छड़ी के बाद ही मैंने छड़ी पकड़ ली और इसकी कीमत 20-30 छड़ियों में चुकानी पड़ी। मेरे जिस्म पर पड़े छड़ी के दाग मेरे मित्र की नजर में इतना अनमोल साबित हुए कि वह मुझसे बिना मिले एक भी दिन नहीं रह पाता था। अतः रविवार को हम दोनों का मिलना और सूर्य का निकलना घर वालों के लिए एक समान था। घरवाले कहते थे कि जब स्कूल में एक ही क्लास में दोनों साथ बैठते हो तो छुट्टी के दिन अलग क्यों नहीं बैठते और टीचर कहते थे कि यहां पढ़ने आते हो कि दोस्ती निभाने। किंतु न जाने कब रास्ते जुदा हो गए और हम दोनों एक दूसरे से अलग रहने की कला भी सीख गए। लेकिन जब पढ़-लिखकर बड़ी नौकरी में आया और यहां जो तथाकथित दोस्ती का अनुभव हुआ, उस पर मैंने एक कविता लिखी- "मुझे मेरे मित्रों से बचाओ"- यह कविता साथ में भेज रहा हूं और निवेदन करता हूं कि एकांत में शांति से बैठ कर थोड़ा सोचें- आखिर क्या ऐसा घटित हुआ कि जो दिल अपने मित्र के बिना चैन नहीं पाता था,वही दिल आज किसी मित्र के आ जाने पर बेचैन होता है? जो दिल पुकार-पुकार कर कहता था मुझे मेरे मित्र से मिलाओ वही दिल आज फुसफुसाता है कि मुझे मेरे मित्रों से बचाओ। मुझे तो लगता है कि शिक्षा और अनुभव ने जिंदगी की सरलता और सहजता छीन ली-" मौसम बदल गया है कि बदल गए हैं लोग ? पता नहीं है कैसे छूट गया वो रोग।।" - 'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे फ्रेंडशिप डे की शुभकामनाओं के साथ और इस अनुरोध के साथ कि नीचे भेजी कविता भी पढ़ेंगे...🙏🌹...👇🏿