राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक तरफ प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति में निहित मूल्य-प्रधानता को प्रमुख रूप से स्वीकार कर रही है तो दूसरी तरफ आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकी प्रविधि को सामान्य जनजीवन का भाग बनाने पर जोर दे रही है। संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण के लिए हृदय एवं मस्तिष्क में संतुलन बनाने हेतु सहशैक्षिक-गतिविधियों को मुख्य पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का प्रावधान अनूठा है। उच्च शिक्षा में विज्ञान व गणित की शिक्षा के साथ मूल्य आधारित शिक्षा,पर्यावरण शिक्षा और जीवन-कौशल शिक्षा का सुंदर सामंजस्य किया जाएगा,जिससे एक ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण किया जाना संभव होगा जो लोकल होने के बावजूद ग्लोबल सोच का होगा। चूंकि अभी तक उच्चशिक्षा प्राप्त व्यक्ति की डिग्री का स्किल से कोई संबंध नहीं था, अतः NEP में समग्रबहुविषयकगुणवत्तापूर्ण-शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाएगा। इस संबंध में पर्याप्त लचीला रुख अपनाया जाएगा और विद्यार्थी को एंट्री एवं एग्जिट में काफी छूट दिया जाएगा और उसके हर साल की मेहनत का परिणाम और प्रमाणपत्र उसे प्राप्त होगा। उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट अनिवार्य होगा। NEP के इस क्रांतिकारी प्रावधान की बहुत प्रशंसा की जा रही है। प्रधानमंत्री जी के शब्दों में जड़ से जग तक,मनुज से मानवता तक और अतीत से आधुनिकता तक को जोड़ने वाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति आत्मनिर्भर भारत बनाने में और विश्व मानव को तैयार करने में सफल होगी। किंतु विचारकों का एक वर्ग मानता है कि स्पेशलाइजेशन के कारण ही उच्च शिक्षा से वैज्ञानिक,विचारक और साहित्यकार पैदा होते हैं। उस विशेषज्ञता को खत्म करने पर Jack of all trades but master of none वाली पीढ़ी तैयार होगी। भारतीय या पश्चात्य शिक्षा पद्धति में भी जो अद्भुत खोजें हुई हैं,उसका बहुत बड़ा कारण एक विषय में बहुत गहराई तक जाना रहा है। प्रशंसाओं और आशंकाओं के बावजूद हम सभी का सौभाग्य है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर हम 'भारत के लोग' गहराई से विचार करने के लिए तैयार हैं और आगे भी एक-एक बिंदु पर सूक्ष्म और व्यापक दृष्टि से विचार करते रहेंगे। शिक्षा जगत का यह विशेष दायित्व है कि Reformation और Implementation के बीच की खाई को पाट सकें क्योंकि सपने जब वास्तविकता के धरातल पर आते हैं तो अजीब रूप में आते हैं- "जब आती कल्पना सत्य की तपोभूमि पर , अपने सपने भी अनजाने से लगते हैं। दूर देश की पगडंडी पर मिलने वाले ,अपरिचित भी जाने पहचाने से लगते हैं।।" 'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे(NEP-1)🙏🌹