सद्भावना दिवस
August 20, 2020"सद्भावना दिवस"- अरस्तु ने कहा था कि'मनुष्य एक विचारशील प्राणी है' किंतु अनुभव बताता है कि मनुष्य भावना से ज्यादा जीता है , विचारणा से कम। जाति, धर्म,क्षेत्र,भाषा इत्यादि के आधार पर भावनाएं भड़का कर घृणा फैलाने में लोग कामयाब हो जाते हैं ,उन्हीं लोगों में जब सद्भावना जाग्रत होती हैं तो वे पाषाण को भगवान बना लेते हैं।जब जगत दुर्भावनाओं का शिकार हो रहा हो तो सद्भावना दिवस अंधेरी रात में चमकने वाली उस बिजली के सामान है,जो रास्ता दिखा जाती है। यह जन्मदिवस है उस व्यक्तित्व का जिसकी सुंदरता एवं मुस्कान दिलों को सुकून देती थी और जिसकी छवि Mr.Clean के रूप में थी। कंप्यूटर क्रांति के जनक को आतंकी हिंसा एवं घृणा ने हमसे छीन लिया। सारे देश की आंखों में आंसू थे और दिल में बदले की आग। किंतु उनके परिजनों ने इस दुर्भावना को सद्भावना में परिवर्तित कर दिया। मुख्य आरोपी नलिनी के फांसी की सजा को माफ किए जाने का प्रस्ताव श्रीमती सोनिया गांधी जी ने राष्ट्रपति को पहुंचाया। नलिनी की बेटी 7 वर्ष की हो गई थी और उससे जेल में प्रियंका गांधी एवं राहुल गांधी जी बात करने पहुंचे। वर्षों तक अपने आंसुओं को पी कर जीने वाली प्रियंका जी ने कहा कि अपने पिता को खोकर अनाथ होने का दर्द हम भोग चुके हैं, यही दर्द तुम्हारी बच्ची को हम भोगने नहीं देंगे। हम तुम्हें माफ करते हैं।. जब से मैंने यह सारा वाकया पढ़ा और जाना तब से मेरा रोम-रोम पुकार उठता है कि भारत एक देश मात्र नहीं बल्कि एक संदेश विशेष है- "वो बुझाएं दिए उन्हें ये शौक है , हमें ये शौक है कि हम जलाते रहे । कोई रिश्ता तो तुमने बनाए रखा ,चाहे दुश्मन समझ कर निभाते रहे।।". घृणा और हिंसा के दुर्भाव से जब आबोहवा प्रदूषित हो चुकी हो तो प्रेम और क्षमा के सद्भाव की आंधी उठाना सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। आखिर क्यों हम जाति, धर्म,क्षेत्र,पार्टी का लेबल लगाकर किसी इंसान के भगवान बनाने वाले महान-कृत्य से प्रेरणा लेने से अपने को बचाएं? दुर्भावना तो खरपतवार के समान है। हर जगह बिन बोये उग आती है। सद्भावना तो गुलाब का फूल है जिसे बड़े जतन से खिलाना पड़ता है। दुर्भावना तो चित्त की विकृति है जबकि सद्भावना आत्मा की स्थिति। दुर्भावना अधर्म है जबकि सद्भावना धर्म। फिर धर्मप्रधान एवं अध्यात्मप्रधान भारत दुर्भावनायुक्त-महामारी के समय में सद्भावना रूपी महाजीवन के लिए स्वयं को क्यों नहीं तैयार करे? 'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹