"परीक्षा मन एवं मौसम के अनुकूल हो " :-परीक्षा स्वयं में बहुत बड़ा तनाव है। उस पर डॉक्टर और इंजीनियर बनने के लिए NEET व JEEपरीक्षा तो परीक्षार्थी के साथ परिवार के लिए भी अग्नि-परीक्षा होती है क्योंकि सब कुछ दाव पर लगा होता है। ऐसे में कोरोना- संक्रमण की बढ़ती संख्या ने लोगों को दहशत से भर दिया है। उस पर से मौसम ने कहर बरपा रखा है। वर्षा एवं बाढ़ ने कई क्षेत्रों में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। ऐसी प्रतिकूल परिस्थिति में और तनाव भरी मन:स्थिति में विद्यार्थियों की मांग है कि सितंबर में परीक्षा न हो। परीक्षा आयोजित करने के अदालत के आदेश के बाद सरकार पर भारी दबाव है। लेकिन पूरा शहर उदास है ,परीक्षा किस तरह से हो ?मौसम भी बदहवास है,परीक्षा किस तरह से हो? दहशत से भर गया है अभी ताजा खिला गुलाब ,सहमा हुआ पलाश है , परीक्षा किस तरह से हो?? सरकार का तर्क है कि अब परीक्षा को टाले जाने से पूरा सेशन और छात्रों का भविष्य बुरी तरह से प्रभावित होगा। एक अभिभावक और शिक्षक के रूप में मेरी सोच यह है कि महामारी और मौसम ने मिलकर परीक्षा देने वाले लाखों किशोर मन को और उनके परिजनों को असमंजस में डाल दिया है। महामारी का पता नहीं किंतु मौसम तो कुछ दिनों के बाद अनुकूल हो सकता है। तब तक परीक्षा केंद्रों की तैयारी और अन्य समस्याओं का समाधान पाने हेतु वक्त मिल जाएगा। विद्यार्थियों की मानसिक तैयारी और मौसम की अनुकूलता बहुत बड़ा अंतर कर देगी। भारत का सर्वाधिक प्रतिभाशाली विद्यार्थी वर्ग सर्वाधिक संख्या में वर्षों की कठिन साधना के बाद इस परीक्षा को देते हैं। अत: उनके मन एवं अनुकूल मौसम के प्रति संवेदनशील व संवादशील होना सरकार एवं समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी है।'शिष्य- गुरु संवाद' से डॉ सर्वजीत दुबे🙏🌹