"मीडिया ट्रायल"- न्यूज़ चैनलों की बाढ़ में लगता है सब कुछ बह गया है- चाहे वह प्रामाणिकता हो या नैतिकता । उस पर से ब्रेकिंग न्यूज़ की खोज और TRP का लोभ मीडिया को जनजागरूकता का माध्यम से दूर हटा कर कन्फ्यूजन- क्रिएटर का माध्यम बना रहा है। एक तरफ तो देश की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाया जा रहा है और दूसरी तरफ व्यक्तिगत मुद्दे को जरूरत से ज्यादा समय देकर उलझाया जा रहा है। इससे भी बड़ा और खतरनाक ट्रेन्ड तो यह चल रहा है कि किसी केस के इतने एंगल सामने में ला दिया जा रहा है कि जांच-एजेंसियों की खोज की दिशा भटक जाती है। आरुषि मर्डर कांड की तरह सुशांत सिंह कांड में भी मीडिया ट्रायल इतना ज्यादा बढ़ गया है कि आरोप-प्रत्यारोप के कारण दोनों ही पक्षों से जुड़े अनेक लोगों की छवि तार-तार हो गई है। सुशांत सिंह का परिवार हो या रिया का परिवार हो; दोनों ही महत्वाकांक्षा एवं योग्यता से भरे मध्यम वर्गीय परिवार के प्रतिनिधि हैं। इस हादसे के बाद दोनों परिवारों का चित्रण जिस प्रकार से किया जा रहा है,उससे समाज में उन सभी का सामान्य रूप से रहना मुश्किल हो जाएगा जबकि सजा एक या दो को मिलेगी। रिया के परिवार को फ्रॉड गैंग की तरह देखा जा रहा है तो दूसरी तरफ सुशांत के परिवार को मतलबी की तरह। जब तक कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिलता तब तक न्यायालय सजा नहीं देता है किंतु समाज तो सुनी-सुनाई बातों पर अपनी राय बना लेता है। जब ऐसी राय न्यूज़ चैनलों द्वारा बार-बार ब्रेकिंग न्यूज़ के रूप में पेश की जाती हैं तो संबंधित व्यक्ति या परिवार का जीना बहुत मुश्किल हो जाता है। 'इतने बदनाम हुए हम तो इस जमाने में ,लगेगी तुमको सदियां अब तो हमें भुलाने में' ऐसी पंक्ति काव्य-जगत में जितनी सराहना पाती हैं, सामाजिक जगत में इसकी हकीकत उतनी ही उलाहनापूर्ण होती है। तभी तो बद अच्छा बदनाम बुरा कहावत खास प्रचलित है। भारतीय प्रेस परिषद और सुप्रीम कोर्ट मीडिया ट्रायल पर अपनी चिंता जता चुका है किंतु इसे खाद- पानी देने वाले तो दर्शक होते हैं। यदि आम जनता इसके प्रति सजग और सावधान हो जाए तो ही इस पर सही मायने में अंकुश लग सकता है। किंतु न पीने का सलीका न पिलाने का शउर ,ऐसे भी लोग चले आए हैं मयखाने में- क्योंकि लक्ष्मण रेखा सीता जी के लिए भी थी कि वो बाहर नहीं जाएं और रावण के लिए भी थी कि वो अंदर नहीं आए। लक्ष्मण रेखा पार करने के कारण आज मीडिया प्रश्नों के घेरे में है किंतु क्या टीआरपी बढ़ाने वाले दर्शक लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं? 'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹