अंतरात्मा और अवमानना
September 1, 2020"अंतरात्मा और अवमानना"- प्रशांत भूषण जी को ₹1 जुर्माने की सजा सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवमानना के मामले में दी गई। उन्होंने जुर्माना भरने के साथ अपनी अंतरात्मा के पक्ष में खड़े होने के लिए पुनर्विचार याचिका की भी बात की। सांकेतिक सजा की स्वीकारोक्ति और अंतरात्मा की अभिव्यक्ति से कई प्रश्न जेहन में एक साथ खड़े हो रहे हैं। कठोपनिषद की कथा है कि पुत्र नचिकेता अपने पिता द्वारा दान में बूढ़ी गायों को दिए जाने पर प्रश्न खड़े करता है। दान में अपनी सबसे प्रिय वस्तु दी जानी चाहिए ऐसा पिता ने सिखाया था तो नचिकेता ने पूछा कि क्या ये बूढ़ी गाएं जो दूध तक नहीं देती हैं,आपके लिए सबसे प्रिय हैं? पिता के लिए सबसे प्रिय तो पुत्र होता है तो आप मुझे दान में क्यों नहीं देते? निर्दोष बालक के प्रश्न में उद्देश्य अवमानना का नहीं था बल्कि उसी पिता द्वारा दी गई शिक्षा के विपरीत आचरण पर उठाया गया सवाल था। फिर भी पिता अपमानित महसूस कर क्रोधित हुए और उन्होंने नचिकेता को दान में मृत्यु के लिए देने की घोषणा कर दी। बालक को वचन और आचरण के बीच का अंतर स्पष्ट दिखाई दे गया किंतु बड़ों को यह क्यों नहीं दिखाई दिया? नचिकेता ने सजा को ज्यों का त्यों स्वीकार कर लिया और यमराज के पास चल दिया। आज की सजा सांकेतिक मात्र है और उस पर से पुनर्विचार याचिका का महत्वपूर्ण स्थान भी है। यह केस बहुत मायने में अनूठा है और गहरे रूप से विचार करने योग्य भी। सत्यमेव जयते की उद्घोषणा करने वाला देश का सर्वोच्च न्यायालय किसी अभिव्यक्ति को सत्य के आधार पर तौले या अवमानना- मानना के आधार पर? कोर्ट की अवमानना महत्वपूर्ण है या अंतरात्मा की अवमानना? अवमानना और अंतरात्मा का यह संघर्ष बड़ा दिलचस्प है। अभियुक्त का यह कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के लिए मेरे दिल में इतनी बड़ी इज्जत है कि उसकी छोटी सी भूल को भी मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट की भी यह उदारता और महानता है कि अवमानना करने वाले पक्ष को अंतरात्मा की आवाज व्यक्त करने के लिए इतना वक्त दिया। शास्त्र कहते हैं कि 'सत्यम् ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्' किंतु वह सत्य मत बोलो जो अप्रिय हो। वह झूठ भी मत बोलो जो प्रिय हो । किंतु वह वाणी कहां से लाई जाए जो सत्य भी हो और प्रिय भी हो क्योंकि सत्य तो कड़वा होता है - "सोज रखता हूं मगर यह साज कहां से लाऊं ?हाल ए दिल कहने का यह अंदाज कहां से लाऊं??" 'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹