आप एक घोड़े को नदी तक लेकर आ सकते हैं किंतु आप उसे पानी नहीं पिला सकते हैं।
September 4, 2020शिक्षक का विकल्प नहीं ऑनलाइन शिक्षा- कोरोना संक्रमण के व्यापक खतरे को देखते हुए शिक्षक एक नई भूमिका में खड़ा हो गया है। Online-Education आज की हकीकत है। वीडियो बनाना,E-Content तैयार करना और व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर विद्यार्थियों से संपर्क स्थापित करना और लाइव क्लासेज लेने में मशगूल शिक्षक को देखकर ऐसा लग रहा है कि यही शिक्षा का भविष्य है । किंतु अल्पकालिक और आंशिक समाधान को शिक्षा और शिक्षक का पूर्णकालिक और स्थाई विकल्प कैसे माना जा सकता है? क्योंकि _(1)ऑनलाइन एजुकेशन की पहुंच और प्रभाव बहुत सीमित है। शिक्षा मौलिक अधिकार है किंतु मोबाइल और इंटरनेट की सुविधा से वंचित बड़ी आबादी को ऑनलाइन एजुकेशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है । NNSO के नवीनतम सर्वेक्षण के अनुसार केवल 42% शहरी और 15% ग्रामीण घरों के पास ही इंटरनेट की उपलब्धता है। 90% आबादी प्रतिदिन लगभग ₹75 से भी कम आय में गुजारा करती हैं ।( 2 ) शिक्षा का प्रांगण और शिक्षक का सानिध्य विविधतापूर्ण समाज में एकता और सहिष्णुता की कला सिखाता है,जिस पर लोकतंत्र का भविष्य निर्भर है जो कि ऑनलाइन एजुकेशन में संभव नहीं है।( 3 ) जो बालक 6ft के ब्लैक बोर्ड पर एकाग्रचित्त नहीं हो पाते थे,वे 16 इंच की स्क्रीन पर अकेले में कितनी देर तक एकाग्र रह पाएंगे?( 4 ) नई शिक्षा नीति में मूल्यपरकता और व्यावसायिकता पर सर्वाधिक जोर है। मूल्यों को जीकर शिक्षक अपने विद्यार्थियों में मूल्य-चेतना जाग्रत करता है और प्रैक्टिकल क्लासेज के माध्यम से कोई स्किल विद्यार्थियों में विकसित किया जाता है। ऑनलाइन एजुकेशन में यह संभव नहीं।( 4 ) जूम,गूगल मीट या सिस्को वेबएक्स ऑनलाइन शिक्षा के प्लेटफार्म हैं जो निजी कॉर्पोरेट के नियंत्रण में है। इनकी प्राथमिकताओं के अनुसार निर्धारित शिक्षा से भारत का क्या भविष्य होगा?( 5 ) केरल की एक मेधावी बच्ची ने स्मार्टफोन के अभाव में आत्महत्या कर ली क्योंकि ऑनलाइन क्लासेज तक वो पहुंच नहीं पा रही थी। भारत के वर्गीकृत समाज में एक और दरार को चौड़ा करने वाला ऑनलाइन शिक्षा का माध्यम INDIA और भारत में बहुत बड़ा अंतर कर देगा। ( 6 ) दूरस्थ शिक्षा और पत्राचार शिक्षा की तरह ऑनलाइन शिक्षा ज्ञानार्जन का एक विकल्प तो हो सकती है परंतु संस्थागत शिक्षा का पर्याय नहीं । यह वैसे स्टूडेंट के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है जो मानसिक और शारीरिक रूप से परिपक्व हैं और तालीम हासिल करने के प्रति खुद जागरूक हैं। किंतु अल्पवयस्क बच्चों और साधारण विद्यार्थियों के लिए यह कई रूपों में न तो उपयोगी है और न ही व्यावहारिक।( 7 ) "आप एक घोड़े को नदी तक लेकर आ सकते हैं किंतु आप उसे पानी नहीं पिला सकते हैं।" यह कहावत ऑनलाइन एजुकेशन के संदर्भ में पूरी तरह से खरा उतरता है लेकिन शिक्षक शिक्षालय में विद्यार्थी को ज्ञान के सागर के करीब लाता भी है और उसे पीने के लिए प्रेरित भी करता है। ( 8 )आर्थिक और शैक्षिक दृष्टिकोण से सबसे पिछड़े जनजातीय इलाके बांसवाड़ा में सारे सरकारी शिक्षक अपनी सारी मेहनत के बावजूद 10% विद्यार्थियों से भी व्हाट्सएप के माध्यम से नहीं जुड़ पा रहे हैं। शेष90% विद्यार्थियों के लिए शिक्षकों के हृदय में बहुत बड़ी पीड़ा है और उन तक पहुंचने के लिए शिक्षक शोध कर रहे हैं क्योंकि "शिक्षक स्वयं एक शोध है। परोपकाराय स्व का बोध है।। "'शिष्य- गुरु संवाद'से डॉ.सर्वजीत दुबे शिक्षक दिवस की शुभकामनाओं के साथ 🙏🌹