विश्व साक्षरता दिवस
September 8, 2020"विश्व साक्षरता दिवस" - कोरोना के विरुद्ध लड़ाई में यदि एक राज्य विश्व की नजरों का ध्यान खींच सका तो वह है केरल। केरल की सफलता के कई कारण हैं किंतु सबसे महत्वपूर्ण कारण है- शत-प्रतिशत साक्षरता और शिक्षा। शिक्षा और स्वास्थ्य पर प्रारंभ से ही सबसे ज्यादा ध्यान देने के कारण केरल के लोग इतने जागरूक हैं और उनमें सामंजस्य इतना जबरदस्त है कि न तो वहां प्रवासी मजदूरों की अफरातफरी का आलम बना और न ही कोरोना संक्रमितों की टेस्टिंग और ट्रेसिंग में कोई खास परेशानी आई। मंगल पर जाने वाले समय में भी यदि भारत में लगभग 30% लोग निरक्षर हैं तो इसका मतलब है कि मंगलयान बनाने वालों के साथ यहां अमंगल भी बसता है- "भरी दुपहरी में अंधियारा, मानव है मानव से हारा।" शरीर के किसी भी एक अंग में यदि कमजोरी और पीड़ा हो तो हम मजबूती और सुख का अहसास नहीं कर सकते। अतः हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि साक्षर और शिक्षित बनने के लिए वह अपनी निरक्षरता और अशिक्षा के अभिशाप के दंश को गहराई से महसूस करे और पढ़े-लिखे लोगों की भी जिम्मेवारी है कि ज्ञान का प्रकाश लेकर उन अंधेरी झोपड़ियों तक पहुंचे जहां पर अभी भी घनघोर अंधकार छाया हुआ है। विकास रूपी वाहन के यदि सभी पहिए बराबर न हो तो उसकी गति अच्छी नहीं हो सकती और वह अपनी मंजिल पर समय सीमा में नहीं पहुंच सकता। सभी जीवो में मानव सर्वश्रेष्ठ इसलिए बन सका कि उसने अक्षर या लिपि का आविष्कार कर लिया। इसके कारण 21वीं सदी में भी हमारे पास पूर्वजों द्वारा किए गए सदियों पूर्व के सारे चिंतन और आविष्कार लिखित रूप में उपलब्ध है और हम उससे आगे की बात सोच सकते हैं। विद्यालय की कमी, स्कूल में शौचालय आदि का न होना,जातिवाद,गरीबी, बालिकाओं से छेड़छाड़ और जागरूकता की कमी इत्यादि कारणों से निरक्षरता हमारा सबसे बड़ा कलंक बना हुआ है। निरक्षर व्यक्ति दिए गए सरकारी आदेशों या अन्य संदेशों को पढ़ नहीं सकता तथा सही ढंग से सोच नहीं सकता। इस कारण से चुनाव के समय उनका मत प्रलोभन देकर खरीद लिया जाता है और भ्रष्ट नेता-अफसर उन्हीं लोगों के लिए बनाई गई सारी सरकारी योजनाओं का लाभ हड़प जाते हैं। जानकारी और सोच के अभाव में एक तरफ जहरीली शराब पीने से सैकड़ों लोग एक साथ काल-कवलित हो जाते हैं तो दूसरी तरफ उनकी पत्नी और बच्चे ऐसी स्थिति में पहुंच जाते हैं जहां शिक्षा से जरूरी मजदूरी हो जाती है। फिर जीवनपर्यंत ऐसे लोग गुलामी की जिंदगी जीने को अभिशप्त हो जाते हैं। काश! ऐसे लोग साक्षर हो पाते तो मलाला की कहानी पढ़ते।इस बच्ची ने तालिबान जैसी शक्ति के विरुद्ध पढ़ने के लिए और स्कूल जाने के लिए लड़ाई लड़ी और गोली खाई किंतु हिम्मत न हारी। साक्षरता और शिक्षा ने मलाला यूसुफजई की सोच को बदल दिया तभी तो वह कहती हैं- "एक पुस्तक और एक शिक्षक जिंदगी बदलने के लिए पर्याप्त हैं।" 2014 में विश्व का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार नोबेल शांति पुरस्कार मलाला को प्राप्त हुआ क्योंकि अक्षर-ज्ञान से प्राप्त शिक्षा ने उसके अंदर की शक्तियों से उसका परिचय करा दिया।। "बचपन बचाओ आंदोलन" के जनक श्री कैलाश सत्यार्थी की स्वार्थी तत्वों ने हड्डियां तक तोड़ दी क्योंकि वे बाल मजदूरी के जंजाल से बचपन को निकालकर उन्हें किताब पकड़ाते हैं और उन्हें साक्षर बनाते हैं। विश्व के 144 देशों के 90000 से अधिक बचपन को उन्होंने न सिर्फ बाल मजदूरी से मुक्त कराया बल्कि निरक्षरता के कलंक से भी मुक्त कराया। इसी कारण 2014 का नोबेल शांति पुरस्कार उन्हें भी दिया गया।। कोरोना काल में मजदूरों की मजदूरी छूटने पर और बच्चों के हाथ से किताब छूटने पर उन्होंने प्रधानमंत्री को एक कारुणिक पत्र लिखा है जिसमें बताया है कि चाइल्ड पॉर्नोग्राफी का व्यवसाय दोगुना हो गया क्योंकि हम बचपन को अक्षर-भजन और भोजन से नहीं जोड़ सके। इस बार शिक्षक दिवस के दिन5/9/20को पुणे के हवेली तालुका में एक मांगडेवाडी स्कूल शिक्षक मोहम्मद आजम जब सामुदायिक कक्षाएं लेने पहुंचे तो 6 महीने के अंतराल के बाद अपने बच्चों के हाथों में पेंसिल और किताबें पकड़ी देखकर माताओं की आंखों में आंसू आ गए। विश्व साक्षरता दिवस मानव के पुनीत संकल्प की याद दिलाता है कि "आओ साक्षरता से प्यार बढ़ाएं ,ताकि पढ़ना भूल न जाएं।" निरक्षरता और अशिक्षा सारे दुर्गुणों की खान हैं जिसके कारण समाज में कई कुप्रथाएं पलती हैं। साक्षरता और शिक्षा के दीप को लेकर हम दूरदराज की झोपड़ियों में जाएं और उन्हें बताएं कि- "कुछ लिखकर सो ,कुछ पढ़कर सो ; तू जिस जगह जागा सवेरे ,उस जगह से बढ़कर सो" - तभी मानव जीवन सार्थक होगा।'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ सर्वजीत दुबे साक्षरता का दीप घर-घर पहुंचाने की शुभकामना के साथ🙏🌹