आवाज तेरी भरी महफिल से उठाती है मुझे , उस जहां की याद दिलाती है मुझे
September 28, 2020बेसुरी दुनिया में सुर-साधिका -आज लता दी का 91 वां जन्मदिवस है जो बेसुरी होती जा रही दुनिया को सुर साधना की दिव्य प्रेरणा देती हैं। भारतीय संस्कृति कहती है कि सुर-असुर संग्राम मानव में सतत चलने वाली प्रक्रिया है। आज चारो तरफ वाणी के कारण कोहराम मचा हुआ है ,ऐसे में सुर ना सधे क्या गाऊं मैं.. संदेश देता है कि वाणी सबको मिली है किंतु उसको जिसने साध लिया और वीणावादिनी का वरदान पा लिया, वह गा सकता है और करोड़ों दिलों को छू सकता है। लेकिन उसके लिए लंबी त्याग-तपस्या से गुजरना पड़ता है।। पिता दीनानाथ मंगेशकर जी को सुनकर लता जी ने गाना सीखा किंतु उनकी हिम्मत पिताजी के सामने गाने की नहीं होती थी। तभी उन्होंने कहा कि पिताजी जिंदा होते तो मैं शायद सिंगर नहीं होती. लेकिन पिताजी की असामयिक मौत ने सबसे बड़ी संतान लता जी को जिम्मेदारियों का अहसास कराया और अपनी प्रतिभा से परिचय भी कराया। उनकी अथक साधना से सरस्वती की ऐसी कृपा प्राप्त हुई कि पार्श्वगायन की प्रतिनिधि को भारत रत्न से नवाजा गया। BACKGROUND मेँ किए गए उनके अथक प्रयास को परमात्मा का ऐसा प्रसाद मिला कि वे Forefront पर आ गईं। उन्हें राज्यसभा का मनोनीत सदस्य बनाकर देश गौरवान्वित हुआ। लेकिन राज्यसभा में उनकी उपस्थिति बहुत कम रही। इस पर किसी पत्रकार ने पूछा तो उन्होंने सदन में होने वाले शोर-शराबे की ओर इशारा करते हुए कहा कि बेसुरों के बीच में सुर साधना बहुत मुश्किल होता है, अतः वे एकांत साधना में चली जाती हैं। आज भी भारत का राष्ट्रीय पर्व उनके द्वारा गाए ऐ मेरे वतन के लोगों...गाने के बिना पूरा नहीं होता। धार्मिक अवसर हो या सांस्कृतिक अवसर; सभी अवसरों के लिए उन्होंने इतने गाने गाए कि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी उनका विशेष रिकॉर्ड है। एक बेटी परिवार की जिम्मेदारियों को संभालते हुए बॉलीवुड जैसी ग्लैमरस और दिखावे की दुनिया में जितनी सादगी और शालीनता के साथ सर्वोच्च ऊंचाई को छू लेने के बाद भी प्रमाणिकतापूर्वक आज भी सुर की साधना में रत है, यह बात भावी पीढ़ियों तक पहुंचनी चाहिए ताकि यह सबको पता चल सके कि सुर-असुर के संग्राम में अंततः जीत तो सुर की ही होती है; बस जरूरत है लता दी जैसी समर्पण और साधना का जीवन जीने की- "आवाज तेरी भरी महफिल से उठाती है मुझे , उस जहां की याद दिलाती है मुझे". 'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹