'संवाद' - "ऑनलाइन-शिक्षा"_


झोपड़ियों तक भी ऑनलाइन- शिक्षा पहुंचाएं , वरना हम दीपावली कैसे मनाएं??


शिक्षालय बंद है और शिक्षक भी पहुंच से बहुत दूर है , गरीब का बच्चा आज पल-पल किस कदर मजबूर है।


कल तक सस्ती किताबें खरीद लाता था , और दीपक में पढ़कर भी अरमान जगाता था।


अब तो स्मार्टफोन,कंप्यूटर,इंटरनेट व प्रिंटर की दरकार है , ऑनलाइन- शिक्षा पर क्या हमारा भी कोई अधिकार है?


साथी ने जब बताया कि व्हाट्सएप मैसेज आया है , मोटिवेशनल स्पीकर हेतु विश्वविद्यालय ने सीट बुक कराया है।


व्हाट्सएप का अर्थ मुझे समझ नहीं आया , फोन करने के लिए हमेशा दूसरों का ही सहारा पाया।


कॉलेज में शिक्षक ने एक दिन वीडियो दिखाया था , कुछ गोल-गोल घूम रहा था और मेरा सर चकराया था।


घर-घर बर्तन मांज कर परिवार ने जो पैसा कमाया था , व्हाट्सएप नंबर और ईमेल आईडी बताने हेतु स्मार्टफोन घर लाया था।


उस पर सारे भाई-बहनों के पीडीएफ नोट्स आते हैं , आंखें फूट जाती हैं पर हम समझ नहीं पाते हैं।


जगमग रोशनी में मुझे तो अंधेरा ही अंधेरा नजर आता है , 'ये वो कौन लोग हैं?' जिन्हें फिर भी भारत विश्वगुरु सा भाता है।


अमीरी की रोशनी ने बस इतना ही सत्य दिखाया है , उनके लिए एक क्लिक पर सारा ज्ञान है पर गरीब के लिए माया है।


डिजिटल इंडिया में टॉपर ऐश्वर्या खुदकुशी क्यूँ करती है? क्या यह पता नहीं कि प्रतिभा दूर गांवों में भी बसती है??