अयं निज परो वेति गणना लघुचेतसाम् , उदारचरितानाम् तु वसुधैव कुटुंबकम
November 16, 2020'संवाद' विश्व सहिष्णुता दिवस 16 नवंबर के संदर्भ में-एक प्रश्न मेरे मन को बार-बार परेशान कर रहा है कि जाति,धर्म, क्षेत्र इत्यादि के नाम पर बनने वाले संगठनों की बाढ़ सी आ गई है,जिसके सम्मेलनों में अपनी विशेष पहचान को और दृढ़ करने के सारे उपाय किए जा रहे हैं। ऐसे हालात में तो कट्टरता और ज्यादा पनपेगी; फिर सहिष्णुता कैसे बढ़ेगी? एक तरफ वोकल फॉर लोकल का नारा बुलंद किया जा रहा है तो दूसरी तरफ सारी बड़ी समस्याएं(पर्यावरण, धर्मांधता,असमानता संबंधित) अपने मूल स्वरूप में ग्लोबल हैं। एक तरफ अपनी विशेष पहचान को बनाए रखने के सारे उपाय किए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ शिक्षा में समानता,स्वतंत्रता,भ्रातृत्व, उदारता, विश्वबंधुता के चैप्टर बढ़ाए जा रहे हैं। कट्टरतावादी अपना संगठन और शक्ति बढ़ाते चले जा रहे हैं और उदारतावादी अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि गांव-परिवार में पड़ोसी के साथ संबंध को बेहतर बनाने हेतु कोई विचार रखता है तो परिवार वाले ही विरोधी हो जाते हैं। प्रतियोगी,विरोधी, विपक्षी,दुश्मन शब्द समानार्थक से हो गए हैं। दुश्मन को पूर्णतया नेस्तनाबूद कर देने का विचार जोर पकड़ रहा है। "अयं निज परो वेति गणना लघुचेतसाम् , उदारचरितानाम् तु वसुधैव कुटुंबकम" का पाठ पढ़ाने वाली संस्कृति मेँ तो संकीर्णता और कट्टरता का बढ़ना आत्ममंथन की मांग करता है। भारतीय संस्कृति की विशेषताओं में से सबसे बड़ी विशेषता है- सहिष्णुता। हिटलर, मुसोलिनी,स्टालिन जर्मनी ,इटली, और रूस में तो पैदा हो सकते हैं किंतु भारत में नहीं। क्योंकि भारत में तो कलिंग युद्ध के बाद सम्राट अशोक का हृदय परिवर्तन हो जाता है और बौद्ध-भिक्षु बन जाता है। जो भी शक, कुषाण इत्यादि विदेशी रूपी नदियां आई हैं,वे भारत रूपी सागर में घुलमिल गई हैं। जाति या धर्म ही नहीं, यहां क्षेत्र या मौसम भी एक सा नहीं है। यदि विश्व को सहिष्णुता का जीता- जागता नमूना ढूंढना हो तो उसे भारत के अतिरिक्त अन्य कोई भी स्थान या देश नहीं मिलेगा। भारत के लिए तो सहिष्णुता रूपी अनमोल हीरा प्रकृति-प्रदत्त भी है और संस्कृति-प्रदत्त भी है। इस नायाब धरोहर का संरक्षण और संवर्धन हम सभी का कर्त्तव्य भी है और नैतिक दायित्व भी-"जमाना जो आतिश-फिसां है तो क्या गम , हम आतिशकदे को गुलिस्तां करेंगे । चले तो जरा दौरे जामे- मुहब्बत फरिश्ते भी तकलीदे-इंसां करेंगे।।" 'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे नववर्ष की शुभकामनाएं 🙏🌹