'संवाद' पंच दिवसीय दीपोत्सव हम सभी ने मना लिया। हम लोगों ने आरोग्य के देवता धनवंतरी की और मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की। अमावस की अंधेरी रातों में हमने दीप जलाए। धन की देवी महालक्ष्मी की अर्चना की गई और पशुधन के देवता गोवर्धन को भी हम सभी ने माथा टेका। भैया दूज के साथ पवित्र रिश्तों को याद करते हुए एक अद्भुत उल्लास और उमंग जीवन में घुलमिल गया। उत्सव के बाद व्यक्ति वही नहीं रहता।यह तन तो ज्यों का त्यों दिखता है किंतु मन जो धरती पर बामुश्किल रेंग पा रहा था अब आकाश में उड़ने लगा। यदि एक बार पंख का पता मात्र चल जाए तो धरती के साथ आकाश भी अपना हो जाता है - " इतना तन्हाई का एहसास दिलाती है मुझे , याद तेरी भरी महफिल से उठाती है मुझे". कार्यालय खुल जाने के बाद भी वह पुलक, वह उमंग, वह आनंद आवाज लगाता रहेगा। उसकी याद कार्यालय को देवालय बनाने की सामर्थ्य रखती है। इन 5 दिनों में हम सभी ने दिन-रात घर की सफाई से लेकर सजावट तक में अपने आप को पूर्णतया निमग्न कर दिया था,फिर भी कोई थकान चेहरे पर नहीं दिखती थी। महामारी भी महाजीवन के इस उत्सव को देखकर ईर्ष्या भाव से भर जाती होगी। निराशा का अंधकार जहां तक फैला हुआ था ,वहां तक हमने आशा के दीप जलाए। बच्चे ने पूछा था कि कोरोना के कारण दिवाली अपनी कितनी उमंगहीन हो जाएगी? इन 5 दिनों में वह इतना तरोताजा हो गया कि- मुस्कुराहट सी खिली रहती है आंखों में कहीं और पलकों पर उजाले से छुपे रहते हैं। स्वयं बच्चे ने कहा कि सारा तनाव दूर हो गया इन 5 दिनों में। महामारी ने हम सब को एक साथ उदास कर दिया था और दीपोत्सव ने हम सब को एक साथ उत्साह एवं ऊर्जा से भर दिया। क्योंकि हमने दिव्य आत्माओं पर अपने मन को केंद्रित कर दिया। जो मन महामारी पर केंद्रित होकर जीवन रस को सुखाता जा रहा था वही मन दिव्य आत्माओं पर केंद्रित होकर आनंद के महासागर से संयुक्त हो गया। उपनिषदों ने आत्मा के बारे में "रसो वै स:" कहा है। इस रस के महासागर से हमें कुछ बूंदें प्राप्त हुई हैं तो हम इतना जीवंत हो उठे हैं, जिस दिन महासागर ही उपलब्ध हो जाए तो क्या होगा?- रस तो अनंत था , अंजुरी भर ही पिया । जी मेँ बसंत था, एक फूल ही लिया।। अब आगे उस अनंत रस की,उस बसंत की याद आती रहेगी। दीपोत्सव ने उस ओर इशारा कर दिया। अब हमें हर कदम उस मंजिल की ओर ही बढ़ाना होगा और साथ मिलकर इसी उल्लास- उमंग के साथ आगे की चुनौतियों से टकराना होगा।-'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹