'संवाद' आयरन लेडी भारत रत्न श्रीमती इंदिरा गांधी जी को जब देश याद करता है तो एक साथ कई उपलब्धियां ध्यान में आती हैं- राजाओं का प्रिवी पर्स खत्म करना, बैंकों का राष्ट्रीयकरण, बांग्लादेश को मुक्त कराना इत्यादि। लेकिन मुझे उनका एक निर्णय बेहद पसंद है जिसमें भारत की बहुत सारी समस्याओं के मूल पर चोट की गई थी। वह दूरदर्शितापूर्ण निर्णय था- जनसंख्या नियंत्रण के लिए उठाए गए कठोर कदम। ओशो ने कहा था कि यदि जनसंख्या विस्फोट को नहीं रोका जा सका तो यह एटम बम और हाइड्रोजन बम से भी खतरनाक बम साबित होगा। जन्म से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है जीवन देना ताकि मानवीय गरिमा के साथ कोई भी जी सके। लेकिन संसाधनों के अभाव में हमारी बहुत बड़ी आबादी शिक्षा और स्वास्थ्य से वंचित होकर नारकीय जीवन जी रही हैं। उस समय सरकार के अनिवार्य नसबंदी कार्यक्रम के विरुद्ध जनता में कुछ भ्रांतियां फैल गईं और इंदिरा जी को अपनी सत्ता गंवानी पड़ी। इसके बाद कोई भी सरकार भारत के सबसे महत्वपूर्ण और ज्वलंत समस्या पर बहुत संभल कर टीका-टिप्पणी मात्र करती है। लेकिन जनसंख्या नियंत्रण का प्रश्न सिर्फ सत्ता बचाने से संबंधित नहीं है बल्कि मानव अस्तित्व को बचाने से सीधा जुड़ा हुआ मामला है। आज कोरोना की महामारी विकराल रूप लेती जा रही है तो उसका सबसे बड़ा कारण जनसंख्या है। यदि सरकार लॉकडाउन लगाती है तो बेरोजगारी का संकट खड़ा हो जाता है और लॉकडाउन हटाती हैं तो महामारी का संकट बढ़ जाता है। मैंने तो एक परिवार को बहुत नजदीक से देखा है जिसमें 11 बच्चे थे। जहां मां-बाप इतने सोए हुए हों, वहां बच्चों के शिक्षा और स्वास्थ्य की चिंता कौन करे। हमेशा कलह और अभाव के कारण आस-पड़ोस का भी जीवन उन लोगों ने नर्क बना दिया था। बेटों में से कुछ दुर्दांत अपराधी निकल गए और बेटियों में से कुछ ने देह व्यापार का सहारा ले लिया। एक दो बच्चे प्रतिभाशाली थे और पढ़ना भी चाहते थे किंतु नजदीक के सगे-संबंधियों ने भी मुंह मोड़ लिया। सगे संबंधियों का भी सोचना था कि 1या2 का मामला होता तो सहायता की भी जा सकती थी,इस पूरे भीड़ की जिम्मेवारी कौन उठाए। उन मां-बाप की मौत भी हुई तो कंधा देने वालों में अपने बच्चों में से कोई नहीं था। इस घटना के साक्षात अनुभव के बाद मुझे इंदिरा जी द्वारा 70 के दशक में उठाया गया यह कदम काफी कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया। भारत के कल्याण के लिए उठाए गए कठोर कदमों को हम सभी धर्म और क्षेत्र के चश्मे से देखने लगते हैं। अफवाह फैलाकर और असहयोग कर उसे विफल करा देते हैं। आज भारत इंदिरा जी के दृढ़ और दूरदर्शितापूर्ण संकल्पों को दिल की गहराइयों से याद कर रहा है- " एक: चंद्र: तमो हंति , न च तारागणो अपि च". उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि मेरे घर में ही इंदु और इंदिरा नाम के 2 सदस्य हैं। जनसंख्या नियंत्रण हेतु कड़े से कड़े उपाय अपनाने की प्रेरणा प्राप्त कर हम सही मायनों में भारत का विश्व में गौरव बढ़ाने वाली इस बेटी का जन्मदिवस सार्थक रूप से मना पाएंगे। -'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹